आम बजट 2026: बायोगैस और इलेक्ट्रिक वाहनों से उत्तराखंड में हरित विकास की राह आसान
देहरादून | 02 फरवरी 2026
उत्तराखंड अब बायोगैस और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल से तरक्की की नई ऊँचाइयों को छू सकेगा। केंद्रीय बजट 2026-27 में सीएनजी में कंप्रेस्ड बायोगैस(“सीबीजी”) मिलाने की योजना शामिल की गई है। इस योजना के तहत इस्तेमाल होने वाला सीबीजी एक्साइज ड्यूटी से अलग रखा जाएगा। इससे न केवल राज्य में कार्बन कटौती को बल मिलेगा बल्कि शहरी क्षेत्रों में चल रही ई-बस सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी। वहीं, गोबर और बायोवेस्ट से बनने वाली बायोगैस ग्रामीणों के लिए सीधे आय का साधन बनेगी।
उत्तराखंड में ईवी योजना अब गेम चेंजर साबित होगी। वर्तमान में ईवी पॉलिसी 2023 लागू है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर केवल कुछ जिलों तक सीमित है। बजट 2026-27 के बाद पहाड़ी इलाकों में इलेक्ट्रिक बसें और ई-टैक्सी मॉडल चल सकेंगे। चारधाम यात्रा में ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर के जरिए पर्यावरण के अनुकूल यात्रा संभव होगी। इसके अलावा स्थानीय युवाओं के लिए ईवी सर्विसिंग और चार्जिंग नेटवर्क में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
किसानों की आय में इजाफा और शहरी क्षेत्रों में सस्ती सीएनजी की सुविधा भी बजट में सुनिश्चित की गई है। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और कोटद्वार जैसे क्षेत्रों में सीएनजी की कीमतों में कमी आएगी। राज्य के 60 प्रतिशत से अधिक गांव पशुपालन पर निर्भर हैं। गोबर, कृषि अपशिष्ट और जंगलों से मिलने वाला बायो-वेस्ट किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन बनेगा। बायोमास आधारित माइक्रो-पावर प्लांट्स से ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
केंद्रीय बजट में कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हरिद्वार-रुद्रपुर औद्योगिक क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट और आईआईटी रुड़की जैसे संस्थान इसके टेस्टिंग हब बन सकते हैं। साथ ही, सौर ऊर्जा, वंदे भारत और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए बजट में 29 प्रतिशत वृद्धि की गई है। रूफटॉप और फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स से उत्तराखंड में हरित ऊर्जा को नई गति मिलेगी।
आम बजट 2026: बायोगैस और इलेक्ट्रिक वाहनों से उत्तराखंड में हरित विकास की राह आसान
उत्तराखंड अब बायोगैस और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल से तरक्की की नई ऊँचाइयों को छू सकेगा। केंद्रीय बजट 2026-27 में सीएनजी में कंप्रेस्ड बायोगैस(“सीबीजी”) मिलाने की योजना शामिल की गई है। इस योजना के तहत इस्तेमाल होने वाला सीबीजी एक्साइज ड्यूटी से अलग रखा जाएगा। इससे न केवल राज्य में कार्बन कटौती को बल मिलेगा बल्कि शहरी क्षेत्रों में चल रही ई-बस सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी। वहीं, गोबर और बायोवेस्ट से बनने वाली बायोगैस ग्रामीणों के लिए सीधे आय का साधन बनेगी।
उत्तराखंड में ईवी योजना अब गेम चेंजर साबित होगी। वर्तमान में ईवी पॉलिसी 2023 लागू है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर केवल कुछ जिलों तक सीमित है। बजट 2026-27 के बाद पहाड़ी इलाकों में इलेक्ट्रिक बसें और ई-टैक्सी मॉडल चल सकेंगे। चारधाम यात्रा में ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर के जरिए पर्यावरण के अनुकूल यात्रा संभव होगी। इसके अलावा स्थानीय युवाओं के लिए ईवी सर्विसिंग और चार्जिंग नेटवर्क में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
किसानों की आय में इजाफा और शहरी क्षेत्रों में सस्ती सीएनजी की सुविधा भी बजट में सुनिश्चित की गई है। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और कोटद्वार जैसे क्षेत्रों में सीएनजी की कीमतों में कमी आएगी। राज्य के 60 प्रतिशत से अधिक गांव पशुपालन पर निर्भर हैं। गोबर, कृषि अपशिष्ट और जंगलों से मिलने वाला बायो-वेस्ट किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन बनेगा। बायोमास आधारित माइक्रो-पावर प्लांट्स से ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
केंद्रीय बजट में कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हरिद्वार-रुद्रपुर औद्योगिक क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट और आईआईटी रुड़की जैसे संस्थान इसके टेस्टिंग हब बन सकते हैं। साथ ही, सौर ऊर्जा, वंदे भारत और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए बजट में 29 प्रतिशत वृद्धि की गई है। रूफटॉप और फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स से उत्तराखंड में हरित ऊर्जा को नई गति मिलेगी।
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