बंगाल में ‘वोट डकैती’ का आरोप, अखिलेश का भाजपा पर तीखा हमला
लखनऊ, 7 मई 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। इस बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला। लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल में भी वही “वोट डकैती मॉडल” अपनाया है, जो पहले उत्तर प्रदेश में देखा गया था।अखिलेश यादव ने कहा कि जो ममता बनर्जी ने बंगाल में अनुभव किया, वही समाजवादी पार्टी 2022 में कन्नौज की छिबरामऊ सीट पर झेल चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय पुलिसकर्मियों ने वेश बदलकर फर्जी मतदान किया था और एक विशेष जाति के अधिकारियों की तैनाती की गई थी।
सपा प्रमुख ने यूपी उपचुनावों का जिक्र करते हुए कुंदरकी, मिल्कीपुर समेत कई सीटों पर भाजपा पर वोट डकैती के आरोप दोहराए। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और 2027 में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगा। साथ ही उन्होंने दावा किया कि आने वाले चुनाव में जनता खुद चुनाव लड़ती नजर आएगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत तब सामने आया जब अखिलेश यादव ने चुनावी रणनीतिकार कंपनी I-PAC से नाता खत्म करने की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कुछ महीनों तक साथ काम हुआ, लेकिन अब आगे साथ नहीं चल पा रहे हैं क्योंकि फंड की कमी है और इतनी फीस देना संभव नहीं है।I-PAC वही कंपनी है जो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के चुनाव अभियान से जुड़ी रही है और यूपी में 2027 के लिए सपा ने भी इसकी जिम्मेदारी दी थी। सूत्रों के अनुसार दिल्ली और बंगाल में बैठकों के बाद यह समझौता हुआ था, हालांकि इसके टूटने को लेकर अन्य कारणों की चर्चाएं भी हैं, जिन्हें अखिलेश ने खारिज कर दिया।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा “ड्राइक्लीन की दुकान” है और ईडी-सीबीआई के आंकड़े खुद सच्चाई बताते हैं। उन्होंने कानपुर और गोरखपुर का उदाहरण देते हुए दावा किया कि भाजपा अपने ही लोगों पर भी छापे डलवाती है।
अंत में उन्होंने कहा कि वह जल्द ही बंगाल जाकर ममता बनर्जी से मुलाकात करेंगे। साथ ही पार्टी नेताओं को मीडिया से “ऑफ द रिकॉर्ड” बातचीत से बचने की सख्त हिदायत दी और केदारश्वर मंदिर के लिए राम मंदिर की तरह चंदा अभियान चलाने की बात कही, यह कहते हुए कि भगवान सबके हैं।
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