Union Budget 2026: सरकार के हर एक रुपये का पूरा हिसाब, आंकड़ों में समझिए कमाई और खर्च की तस्वीर

नई दिल्ली | 19 जनवरी 2026


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को लोकसभा में वित्त वर्ष 2024-25 का बजट पेश किया था। यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट था, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई थीं। बजट का कुल आकार 50 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा। आम लोगों के लिए आयकर में राहत, विकास योजनाएं और खर्च का खाका तो सामने आया, लेकिन अक्सर यह सवाल रह जाता है कि सरकार के पास पैसा कहां से आता है और वह इसे कहां खर्च करती है।


सरकार की कमाई को समझें तो बजट के हर एक रुपये में सबसे बड़ा हिस्सा उधारी और अन्य देनदारियों से आया। एक रुपये में 24 पैसे सरकार ने उधार के जरिए जुटाए। इसके बाद 22 पैसे आयकर से आए। जीएसटी और अन्य करों से 18 पैसे मिले, जबकि कंपनियों से वसूले जाने वाले निगम कर से 17 पैसे सरकार के खाते में पहुंचे। गैर-कर राजस्व से 9 पैसे, केंद्रीय उत्पाद शुल्क से 5 पैसे और सीमा शुल्क से 4 पैसे की आय हुई। उधार के अलावा अन्य पूंजीगत स्रोतों से केवल 1 पैसा मिला।


अब बात करें खर्च की, तो सरकार के हर एक रुपये में से सबसे ज्यादा पैसा पुराने कर्ज के ब्याज चुकाने में गया। कुल 20 पैसे सिर्फ ब्याज भुगतान पर खर्च हुए। इसके अलावा 22 पैसे राज्यों को करों और शुल्कों में उनके हिस्से के रूप में दिए गए। केंद्र सरकार ने 16 पैसे केंद्रीय योजनाओं पर और 8 पैसे केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर खर्च किए।


रक्षा क्षेत्र पर 8 पैसे खर्च किए गए, जबकि वित्त आयोग और अन्य मदों में भी 8 पैसे गए। सब्सिडी के लिए 6 पैसे, पेंशन पर 4 पैसे और अन्य खर्चों में 8 पैसे लगाए गए। इस तरह बजट के आंकड़े साफ दिखाते हैं कि सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा उधारी और करों से आता है, जबकि खर्च का बड़ा भाग ब्याज भुगतान, राज्यों को हिस्सेदारी और विकास योजनाओं में जाता है। यही बजट के हर एक रुपये की पूरी गणित है, जिसे समझना हर नागरिक के लिए जरूरी है।


 बजट 2026: सरकार के हर एक रुपये का पूरा हिसाब, आंकड़ों में समझिए कमाई और खर्च की तस्वीर


फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को लोकसभा में वित्त वर्ष 2024-25 का बजट पेश किया था। यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला पूरा बजट था, जिसे देशभर में ध्यान से देखा गया। बजट में कई बड़े ऐलान किए गए, लेकिन आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही था कि सरकार के पास पैसा कहां से आता है और कहां खर्च होता है।


बजट के आंकड़ों के हिसाब से हर एक रुपये में सबसे बड़ा हिस्सा उधारी और अन्य देनदारियों से आता है। यानी एक रुपये में से 24 पैसे सरकार ने उधार लेकर जुटाए। उसके बाद आयकर से 22 पैसे, GST और अन्य करों से 18 पैसे और कंपनी टैक्स से 17 पैसे सरकार को मिले। इसके अलावा गैर-कर आय से 9 पैसे, उत्पाद शुल्क से 5 पैसे, सीमा शुल्क से 4 पैसे और अन्य स्रोतों से 1 पैसा आया।


अब खर्च की बात करें तो हर एक रुपये में से सबसे ज्यादा पैसा कर्ज के ब्याज भुगतान में गया—20 पैसे। राज्यों को करों और शुल्कों का हिस्सा देने में 22 पैसे खर्च हुए। सरकार ने केंद्रीय योजनाओं पर 16 पैसे और केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर 8 पैसे खर्च किए।


इसके अलावा रक्षा में 8 पैसे, वित्त आयोग और अन्य मदों में 8 पैसे, सब्सिडी पर 6 पैसे, पेंशन पर 4 पैसे और अन्य खर्चों पर 8 पैसे खर्च किए गए। यही बजट की असल तस्वीर है—कमाई का बड़ा हिस्सा कर और उधारी से आता है, जबकि खर्च का बड़ा हिस्सा कर्ज के ब्याज, राज्यों को हिस्सेदारी और विकास योजनाओं पर जाता है।


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