बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 1.25 करोड़ ‘तार्किक विसंगति’ वाले मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करने का आदेश

नई दिल्ली | 19 जनवरी 2026


पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को कड़ा निर्देश दिया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जिन करीब 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम ‘तार्किक विसंगति’ की सूची में शामिल हैं, उनकी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि आम नागरिक खुद जांच कर सकें।


मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्देश दिया कि यह सूची ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और वार्ड कार्यालयों में चस्पा की जाए। कोर्ट ने कहा कि मतदाताओं को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनका नाम किस आधार पर जांच के दायरे में आया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह विसंगतियां मुख्य रूप से 2002 की मतदाता सूची से वंश (प्रोजेनी) मिलान के दौरान सामने आई हैं।


अदालत के अनुसार, विसंगतियों में ऐसे मामले शामिल हैं जहां मतदाता और उसके माता-पिता के नाम मेल नहीं खाते, या फिर उम्र का अंतर 15 साल से कम या 50 साल से अधिक है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ इन कारणों से किसी का नाम हटाया नहीं जा सकता और हर प्रभावित व्यक्ति को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए।


कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि दस्तावेज जमा करने और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में विशेष काउंटर बनाए जाएं। साथ ही राज्य सरकार को चुनाव आयोग को पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराने और हर जिले में निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया गया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे और कोई अव्यवस्था न हो।


गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट यह मामला उन याचिकाओं पर सुन रहा है, जिनमें SIR प्रक्रिया में मनमानी और प्रक्रियागत खामियों का आरोप लगाया गया है। अदालत ने जोर देते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने वाली होनी चाहिए, ताकि किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर न हो।


बंगाल मतदाता सूची संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 1.25 करोड़ नाम सार्वजनिक करने का आदेश


विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि ‘तार्किक विसंगति’ की सूची में शामिल करीब 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम सार्वजनिक किए जाएं, ताकि लोग खुद अपनी स्थिति की जांच कर सकें।


मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि यह सूची ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और वार्ड कार्यालयों में लगाई जाए। कोर्ट ने बताया कि ये विसंगतियां ज्यादातर 2002 की मतदाता सूची से मिलान के दौरान सामने आई हैं, जिनमें नामों का मेल न होना और उम्र से जुड़ी गड़बड़ियां शामिल हैं।


सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी मतदाता का नाम बिना मौका दिए नहीं हटाया जा सकता। अदालत ने आदेश दिया कि प्रभावित लोगों को दस्तावेज जमा करने और आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया जाए। इसके लिए स्थानीय स्तर पर विशेष काउंटर बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।


कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को भी जिम्मेदारी सौंपी है कि पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से पूरी हो। चुनाव आयोग को पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने जोर दिया कि यह पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने वाली होनी चाहि

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