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टाइफाइड बना गंभीर स्वास्थ्य संकट: 2023 में 49 लाख से ज्यादा मामले, 7,850 मौतें; दवाएं हो रहीं बेअसर
दिल्ली | 17 जनवरी 2026
भारत में मियादी बुखार यानी टाइफाइड एक बार फिर गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में सामने आया है। नए अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2023 में देशभर में टाइफाइड के कुल 49,30,326 मामले दर्ज किए गए, जबकि इस बीमारी से 7,850 लोगों की मौत हो गई। हालात को और चिंताजनक बनाने वाली बात यह है कि इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई प्रमुख एंटीबायोटिक दवाएं अब असरदार नहीं रह गई हैं, जिससे मरीजों का उपचार दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है।
अध्ययन में सामने आया है कि कुल मामलों में से करीब 29 प्रतिशत सिर्फ तीन राज्यों—दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक—से सामने आए हैं। इन राज्यों में संक्रमण की दर के साथ-साथ दवा-प्रतिरोधी मामलों और मौतों की संख्या भी अधिक पाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी आबादी का दबाव, साफ पानी की कमी और कमजोर स्वच्छता व्यवस्था टाइफाइड के फैलाव में बड़ी भूमिका निभा रही है। टाइफाइड दूषित पानी और गंदे भोजन से फैलने वाला बैक्टीरियल संक्रमण है, जिसके लक्षण आमतौर पर एक से तीन सप्ताह बाद दिखाई देते हैं।
बच्चों में यह बीमारी सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। आंकड़ों के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के करीब 3.21 लाख बच्चों को टाइफाइड के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस आयु वर्ग में 2,600 बच्चों की मौत दर्ज की गई। वहीं, पांच से नौ साल के बच्चों में भी संक्रमण का बोझ काफी अधिक रहा, जहां लगभग 2.65 लाख बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया गया और करीब 2,900 बच्चों की जान गई। अध्ययन के मुताबिक छह महीने से चार साल की उम्र के बच्चों में संक्रमण और मृत्यु का खतरा सबसे ज्यादा पाया गया है।
यह अध्ययन लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन, वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज सहित कई संस्थानों के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है और इसके नतीजे प्रतिष्ठित जर्नल द लैंसेट रीजनल हेल्थ: साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित हुए हैं। शोध में बताया गया है कि साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया में दवा-प्रतिरोध दशकों से बढ़ रहा है। खासतौर पर फ्लोरोक्विनोलोन दवाओं के प्रति प्रतिरोध 1989 से लगातार 60 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है और 2017 में यह 94 प्रतिशत तक पहुंच गया था। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि स्वच्छ पानी, बेहतर साफ-सफाई और दवा-प्रतिरोध पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में टाइफाइड और भी बड़ा स्वास्थ्य संकट बन सकता टाइफाइड ने बढ़ाई देश की चिंता, लाखों मरीज और हजारों मौतें
भारत में मियादी बुखार यानी टाइफाइड एक बार फिर गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। वर्ष 2023 में देशभर में इसके 49 लाख से अधिक मामले सामने आए, जबकि 7,850 लोगों की जान चली गई। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई एंटीबायोटिक दवाएं अब असर नहीं कर रही हैं, जिससे बीमारी पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है।
अध्ययन के अनुसार, कुल मामलों में से करीब 29 प्रतिशत सिर्फ दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक से दर्ज किए गए हैं। इन राज्यों में संक्रमण की दर ज्यादा होने के साथ-साथ दवा-प्रतिरोधी मामले भी तेजी से बढ़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि साफ पानी की कमी और कमजोर स्वच्छता व्यवस्था टाइफाइड के फैलने की बड़ी वजह बन रही है।
बच्चों पर टाइफाइड का असर सबसे गंभीर देखा गया है। पांच साल से कम उम्र के करीब 3.21 लाख बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिनमें 2,600 बच्चों की मौत हो गई। पांच से नौ साल की उम्र के बच्चों में भी संक्रमण का बोझ ज्यादा रहा और इस आयु वर्ग में करीब 2,900 बच्चों की जान गई।
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि टाइफाइड के बैक्टीरिया में दवा-प्रतिरोध लगातार बढ़ रहा है। लंबे समय से इस्तेमाल हो रही दवाएं अब बेअसर साबित हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्वच्छ पानी, साफ-सफाई और समय पर इलाज पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह बीमारी आने वाले समय में और बड़ा संकट बन सकती है।
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