GST घोटाला: 100 करोड़ की कर चोरी में CGST इंस्पेक्टर फंसा, STF ने कसा शिकंजा

लखनऊ में सामने आए 100 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के मामले में जांच के दौरान बड़ा मोड़ आया है। एसटीएफ ने खुलासा किया है कि इस संगठित कर चोरी गिरोह में सेंट्रल जीएसटी का एक इंस्पेक्टर भी शामिल था। दिल्ली में तैनात इस अधिकारी को गाजियाबाद में दर्ज एफआईआर में आरोपी बनाया गया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए टीमें सक्रिय हैं।


एसटीएफ पहले ही इस केस में दिल्ली के स्क्रैप कारोबारी हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच में पता चला कि इन लोगों ने बोगस कंपनियां बनाकर और फर्जी ई-वे बिल व इनवॉइस के सहारे करीब 100 करोड़ रुपये का टैक्स हेरफेर किया। यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और व्यवस्थित तरीके से काम कर रहा था।


तफ्तीश के दौरान सामने आया कि CGST इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल ने गिरोह को विभागीय स्तर पर संरक्षण दिया। आरोप है कि उसने निलंबित फर्मों को दोबारा चालू कराने में मदद की और इसके बदले मोटी रकम ली। एक बोगस फर्म को बहाल कराने के लिए उसे नकद भुगतान किए जाने के भी सबूत मिले हैं।


एसटीएफ ने आरोपियों के मोबाइल से व्हाट्सएप चैट रिकवर की है, जिनमें लेन-देन और नियमों से छेड़छाड़ की बातचीत दर्ज है। अधिकारियों का कहना है कि इंस्पेक्टर की भूमिका गंभीर है और जल्द ही गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। जांच के दायरे में अन्य संदिग्धों और फर्जी फर्मों की भी पड़ताल जारी है।



100 करोड़ की GST चोरी में CGST इंस्पेक्टर की संलिप्तता उजागर, STF की कार्रवाई तेज


लखनऊ | 11 जनवरी 2026


करीब 100 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के बड़े मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच के दौरान सेंट्रल जीएसटी (CGST) में तैनात एक इंस्पेक्टर की संलिप्तता सामने आने के बाद उसे भी आरोपी बनाया गया है। इंस्पेक्टर की वर्तमान तैनाती दिल्ली में बताई जा रही है, जबकि उसके खिलाफ गाजियाबाद के कविनगर थाने में दर्ज एफआईआर में नाम जोड़ा गया है। एसटीएफ उसकी तलाश में जुटी हुई है।


एसटीएफ लखनऊ की टीम ने इस मामले में पहले ही दिल्ली निवासी स्क्रैप कारोबारी हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस, जितेंद्र झा, पुनीत अग्रवाल और शिवम सिंह को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि इन लोगों ने बोगस कंपनियां बनाकर और फर्जी ई-वे बिल व इनवॉइस के जरिए लगभग 100 करोड़ रुपये की कर चोरी की। जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क को विभागीय स्तर पर संरक्षण मिल रहा था।


तफ्तीश में खुलासा हुआ कि दिल्ली में तैनात CGST इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल इस गिरोह को सक्रिय मदद दे रहा था। एसटीएफ के अनुसार, उसने फर्जी फर्मों को बचाने और निलंबित कंपनियों को दोबारा बहाल कराने में अहम भूमिका निभाई। आरोप है कि पुनीत अग्रवाल की बोगस फर्म ‘एडॉन ऑटोमोबाइल’ को रिस्टोर कराने के बदले इंस्पेक्टर को 40 हजार रुपये दिए गए थे, जबकि कुल मिलाकर उसने लाखों रुपये वसूले।


एसटीएफ ने पुनीत अग्रवाल के मोबाइल से बरामद व्हाट्सएप चैट के जरिए लेन-देन और हेराफेरी से जुड़े पुख्ता सबूत जुटाए हैं। एसटीएफ के सीओ प्रमेश शुक्ला ने बताया कि इंस्पेक्टर की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है और उसकी गिरफ्तारी के लिए अलग से टीम गठित की गई है। साथ ही, हरियाणा निवासी आलोक नामक व्यक्ति की भी भूमिका उजागर हुई है, जो कमीशन पर फर्जी फर्में उपलब्ध कराता था। मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है।


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