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धरती माता को बचाना है तो भारतीय नस्ल की गौ माता को बचाना होगा’: सीएम योगी
लखनऊ, 29 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय नस्ल की गायों के संरक्षण को पर्यावरण, पोषण और सामाजिक भागीदारी से जोड़ते हुए लोगों से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने प्रदेश में निराश्रित गोवंश के लिए की गई व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार गोशालाओं के संचालन से लेकर किसानों और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता देने तक कई स्तरों पर काम कर रही है।
सीएम योगी ने कहा, “अगर धरती माता को बचाना है तो भारतीय नस्ल की गौ माता को बचाना पड़ेगा। भारतीय गौ माता की भारत की परंपरा से जुड़ी हुई गौ माता को बचाना पड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा, “उसके संरक्षण के लिए उसके संवर्धन के लिए सभी को प्रयास करना पड़ेगा। एक साथ जुटना पड़ेगा। देखो सरकार तो पूरी तरह तैयार है। हर प्रकार का सहयोग कर रही है।”
गोवंश की देखभाल के लिए प्रदेश में किए गए इंतजामों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “7700 से अधिक गौशालाओं का संरक्षण, गौशालाओं का निर्माण किया। और 16 लाख से अधिक गोवंश को उसमें रख करके उनका लालन-पालन कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि अपने घर में निराश्रित गोवंश रखने वाले किसान को प्रति गाय 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। चार गोवंश रखने पर यह सहायता 6,000 रुपये प्रतिमाह हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने देसी गाय के दूध को पोषण से जोड़ते हुए कहा कि कुपोषित बच्चे वाले परिवारों को गो-आश्रय स्थलों से एक या दो गाय उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। उनके मुताबिक, गाय दिए जाने के साथ ऐसे परिवारों को प्रति गाय हर महीने 1,500 रुपये की सहायता भी दी जाती है और प्रदेश में हजारों परिवारों को इस व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने उन लोगों से भी गो संरक्षण में योगदान देने की अपील की जो शहरों या ऊंची इमारतों में रहने के कारण अपने घर में गाय नहीं रख सकते। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग किसी गोशाला में गाय को गोद लेकर उसके पालन-पोषण के लिए हर महीने आर्थिक सहयोग दे सकते हैं और गोपाष्टमी के अवसर पर वहां जाकर गोमाता का तिलक कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने गो संरक्षण को सरकार के साथ समाज की साझा जिम्मेदारी बताते हुए लोगों से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। उनके संबोधन का मुख्य जोर निराश्रित गोवंश की देखभाल में जनभागीदारी बढ़ाने और सरकारी व्यवस्थाओं के साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी गो संरक्षण में योगदान देने पर रहा।
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