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मुरली मनोहर जोशी बोले- छात्रों की जायज मांगें सुनी जाएं, डंडे से नहीं होगा समाधान
नई दिल्ली, 08 अक्टूबर 2026
पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने नई शिक्षा नीति और छात्र आंदोलनों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति को लागू हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए हैं, इसलिए इसके दूरगामी परिणामों का आकलन करना जल्दबाजी होगी। साथ ही उन्होंने छात्र आंदोलनों के संदर्भ में कहा कि छात्रों की जायज मांगों को संवेदनशीलता के साथ सुना जाना चाहिए और बल प्रयोग के जरिए किसी समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता।
जोशी ने कहा, “इसमें कई तरह के कौतूहल हैं। पक्ष में और विपक्ष में भी कई तरह के विचार हैं। ऐसा है कि इसको कहना चाहिए विचारणीय विषय है क्योंकि नई शिक्षा नीति को अभी चले हुए कुछ समय नहीं हुआ है ना, तो उसके बारे में क्या कहें। पुरानी शिक्षा नीति थी, उसमें तो बीस-पच्चीस-तीस साल चले थे तो कुछ हम कह सकते थे। अब तो ये अभी शुरुआत है इसकी ना, दो-चार साल से ही तो चली है। देश बहुत बड़ा है तो इसके क्या परिणाम होंगे, ये तो बाद में पता लगेगा। लेकिन जो पुरानी थी उनको तो हमने देख लिया, उसमें कुछ कमियां थीं, ये इसके बारे में सोचा गया है, इसको देखेंगे आगे। छात्र भी इसको लेकर कई तरह के आंदोलन भी अभी चल रहे हैं...”
छात्र आंदोलनों पर उन्होंने कहा, “देखो आंदोलनों की बात अलग है। जो छात्रों की वाजिब मांगें हैं वो तो हमेशा सुनी जानी चाहिए और बहुत ही सहानुभूति के साथ सुनी जानी चाहिए। ये डंडा मारने का जो तरीका है ये उचित नहीं होता है। इससे कभी आप समाधान नहीं कर सकते।”
उन्होंने छात्रों की समस्याओं को समझाने के लिए परिवार का उदाहरण देते हुए कहा, “अगर समस्याएं हैं उसको सुनिए। हमारे बच्चे हैं, उन्होंने कहा आपने कहा पिता जी आपने हमें कहा था कि हमें ये दिलाएंगे, अच्छा कोट दिलाएंगे, इस बार आपने कहा नहीं दे पाए बेटे पैसा नहीं था, अगली बार दे देंगे। उसे बताइए ना कि दिक्कत थी, पैसा नहीं था इसलिए नहीं खरीद पाए, अगली बार खरीदेंगे। लेकिन तो कहना अब हो गया, ये तो ठीक तरीका है।”
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विपक्ष से जुड़े सवालों पर जोशी ने कहा, “मैं ना विपक्ष में हूं ना पक्ष में हूं, मैं तो शिक्षा में हूं।” उन्होंने आगे लोकतंत्र के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार जनता की हो, जनता के लिए हो और जनता द्वारा चुनी गई हो, यह व्यवस्था तभी कायम रह सकती है जब चुनाव निष्पक्ष हों, सरकारें जवाबदेह हों, नौकरशाही पारदर्शी हो और विपक्ष उत्तरदायी तथा जिम्मेदार होने के साथ स्पष्ट वैकल्पिक कार्यक्रम रखता हो। उन्होंने कहा कि पूरी व्यवस्था संविधान के दायरे में होनी चाहिए और संविधान का उल्लंघन होने पर सुप्रीम कोर्ट को उस पर विचार करना चाहिए। जोशी के बयान में शिक्षा नीति के परिणामों को समय देने, छात्रों की जायज मांगों को संवेदनशीलता से सुनने और लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर जोर दिया गया।
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