यूपी में नौकरी का नया लक्ष्य: 6 महीने में 1 लाख नियुक्तियां
लखनऊ, 25 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा लक्ष्य सामने रखा है। मंगलवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 3,446 प्राविधिक सहायकों और 126 मंडी सचिवों को नियुक्ति-पत्र वितरित करने के दौरान उन्होंने कहा कि आने वाले छह महीनों में एक लाख और युवाओं को सरकारी नियुक्ति-पत्र दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की भर्ती नीति में पारदर्शिता, मेरिट और आरक्षण नियमों का पालन प्रमुख आधार हैं तथा चयन प्रक्रिया में किसी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले करीब साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश के 9.30 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है और दावा किया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में हुई भर्तियों की निष्पक्षता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। साथ ही उन्होंने भर्ती बोर्डों और आयोगों से परीक्षा और परिणाम के बीच का समय और कम करने को कहा। उनके अनुसार, जहां पहले परिणाम आने में महीनों लगते थे और नकल के कारण परीक्षा व्यवस्था की साख प्रभावित होती थी, वहीं अब कई परीक्षाओं में 14 दिन के भीतर परीक्षा और उसके अगले 14 दिनों में परिणाम जारी करने की व्यवस्था की गई है।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में 2017 से पहले की सरकारों की भर्ती व्यवस्था पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “2017 से पहले सरकारी भर्ती का विज्ञापन जारी होते ही ‘चाचा-भतीजा’ और पूरा खानदान वसूली के लिए निकल पड़ता था।” मुख्यमंत्री के अनुसार, उस दौर में भ्रष्टाचार के कारण युवाओं का समय और भविष्य दोनों प्रभावित होते थे। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का फैसला किया गया और इसे लागू भी किया गया। योगी ने प्रदेश के व्यापक बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि कभी उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू राज्य’ कहा जाता था, युवा रोजगार के लिए बाहर जाते थे, किसान परेशान थे, बेटियों की सुरक्षा चिंता का विषय थी और व्यापारी माफिया के दबाव में रहते थे। उन्होंने दावा किया कि अब प्रदेश की स्थिति बदली है और प्रति व्यक्ति आय में करीब तीन गुना वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने युवाओं की प्रतिभा को प्रदेश के विकास की शक्ति से जोड़ने का प्रयास किया है।
मुख्यमंत्री ने जापान से आए प्रतिनिधिमंडल का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल रही है। उन्होंने इजराइल भेजे गए 5,000 से अधिक युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वहां काम कर रहे युवा अच्छी आय अर्जित कर अपने परिवारों को पैसा भेज रहे हैं। नवनियुक्त मंडी सचिवों को संबोधित करते हुए योगी ने किसानों के हितों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मंडियों में साफ-सफाई, किसानों के बैठने की सुविधा और उनके सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है, जबकि उनकी आय बढ़ाने की दिशा में काम करना भी मंडी व्यवस्था की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि केवल नारे लगाने से राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, बल्कि अपने दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन करना ही वास्तविक ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना है। मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था और बिजली व्यवस्था में सुधार का भी दावा करते हुए कहा कि पहले किसान को ट्यूबवेल की मोटर चोरी होने की चिंता रहती थी, जबकि अब चोरी करने वालों में कानून का भय है। उन्होंने कहा कि जहां पहले कई क्षेत्रों में सीमित समय के लिए बिजली मिलती थी, वहीं अब किसानों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
गन्ना किसानों, चीनी मिलों और चीनी की उपलब्धता का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के संबोधन में प्रमुखता से उठा। योगी ने पिछली सपा-बसपा सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में कई चीनी मिलों को औने-पौने दामों में बेच दिया गया, जबकि वर्तमान सरकार के समय 100 से अधिक चीनी मिलें संचालित हो रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में किसानों को 24 घंटे के भीतर राहत राशि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में चीनी की कमी की चर्चाओं को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में हर महीने करीब चार लाख टन चीनी की खपत होती है, जबकि इस समय लगभग 28 लाख टन का भंडार मौजूद है। उन्होंने कहा कि 15 अक्टूबर से चीनी मिलों के दोबारा शुरू होने के बाद उत्पादन बढ़ेगा और करीब 90 लाख टन चीनी उपलब्ध हो जाएगी। रोजगार से लेकर किसानों की सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों तक, मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सरकार की नीतियों को प्रदेश में बदलाव और विकास के व्यापक दावे से जोड़ते हुए आगे की दिशा भी स्पष्ट की।
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