सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे, PM Modi अमृत महोत्सव में लेंगे भाग

प्रधानमंत्री  मोदी 11 मई को  सुबह लगभग 10:15 बजे सोमनाथ अमृत महोत्सव में भाग लेंगे, जो भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और भारत की अटूट आस्था और सभ्यतागत विरासत का प्रतीक है। सोमनाथ अमृत महोत्सव जीर्णोद्धार किए गए मंदिर के उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है।

उत्सवों के हिस्से के रूप में, प्रधानमंत्री कई शुभ धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। वे विशेष महा पूजा में शामिल होंगे, जिसके बाद कुंभभिषेक और ध्वजारोहण समारोह होंगे, जो मंदिर के अभिषेक और ध्वजारोहण के प्रतीक हैं।

प्रधानमंत्री इस अवसर पर सोमनाथ की समृद्ध विरासत और आध्यात्मिक महत्व को याद करते हुए एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी करेंगे।

आइये  जानते हैं अखिर क्यूँ है ये मंदिर  इतना खास....

सोमनाथ मन्दिर भूमण्डल में दक्षिण एशिया स्थित भारतवर्ष  के पश्चिमी छोर पर गुजरात  नामक प्रदेश स्थित, अत्यन्त प्राचीन व ऐतिहासिक  शिव मंदिर का नाम है। यह भारतीय इतिहास तथा  हिन्दू के चुनिन्दा और महत्वपूर्ण मन्दिरों में से एक है। इसे आज भी भारत के 12 ज्योतिर्लिंग  में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में माना व जाना जाता है। गुजरात  के  सौराष्ट्र  क्षेत्र के वेरावल  बन्दरगाह में स्थित इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, जिसका उल्लेख रिगवेद  में स्पष्ट है। लोककथाओं के अनुसार यहीं श्रीकृष्ण ने देहत्याग किया था। इस कारण इस क्षेत्र का और भी महत्त्व बढ़ गया।
सोमनाथ मंदिर गुजरात के वेरावल में स्थित है और मुख्य रूप से भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम (सबसे पहला) ज्योतिर्लिंग होने के कारण प्रसिद्ध है। यह अत्यंत प्राचीन, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल है, जहाँ पौराणिक कथाओं के अनुसार चंद्रदेव ने श्राप से मुक्ति पाने के लिए शिवजी की पूजा की थी।सोमनाथ के प्रसिद्ध होने के मुख्य कारण:प्रथम ज्योतिर्लिंग: हिंदू धर्म में इसे शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला और सर्वोच्च माना जाता है।अमर और ऐतिहासिक मंदिर: यह मंदिर बार-बार विदेशी आक्रमणों (महमूद गजनवी आदि) द्वारा तोड़े जाने के बावजूद, भारतीय आस्था के प्रतीक के रूप में बार-बार पुनर्निर्मित हुआ।पौराणिक महत्व: मान्यता है कि यहीं भगवान श्रीकृष्ण ने अपना देह त्याग किया था और यह सोमनाथ "चंद्रमा के स्वामी" का निवास स्थान माना जाता है।त्रिवेणी संगम: यह मंदिर हिरन, कपिला और सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित है, जिसे अत्यंत पवित्र तीर्थ माना जाता है।भव्य वास्तुकला: वर्तमान मंदिर चालुक्य शैली (कैलाश महामेरु प्रासाद) में बना है, जिसका पुनर्निर्माण सरदार वल्लभभाई पटेल के मार्गदर्शन में 1951 में हुआ था।यह स्थान आध्यात्मिक शांति और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की गाथा के लिए जाना जाता है।

यह मन्दिर हिन्दू धर्म के उत्थान-पतन के इतिहास का प्रतीक रहा है। अत्यन्त वैभवशाली होने के कारण इतिहास में कई बार यह मंदिर तोड़ा तथा पुनर्निर्मित किया गया। वर्तमान भवन के पुनर्निर्माण का आरम्भ भारत की स्वतन्त्रता के पश्चात् लौहपुरुष  सरदार वल्लभ भाई पटेल  र्ने करवाया और पहली दिसम्बर 1955 को भारत के राष्ट्रपति  राजेंद्र प्रसाद  ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया। सोमनाथ मन्दिर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटन स्थल है। मन्दिर प्रांगण में रात साढ़े सात से साढ़े आठ बजे तक एक घण्टे का साउण्ड एण्ड लाइट शो चलता है, जिसमें सोमनाथ मन्दिर के इतिहास का बड़ा ही सुन्दर सचित्र वर्णन किया जाता है।

सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण
गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर को इतिहास में 17 बार लूटा और नष्ट किया गया, जिसे बार-बार पुनर्निर्मित किया गया। इस पर सबसे प्रमुख और विनाशकारी हमले महमूद गजनवी (1026 ई.), अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति (1297 ई.) और औरंगजेब (1665, 1706 ई.) ने किए। 

Read Previous

Samsung goes big in India factory ever created

Read Next

Samsung goes big in India factory ever created

Add Comment

Sign up for the Newsletter

Join our newsletter and get updates in your inbox. We won’t spam you and we respect your privacy.