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Tuesday, 03 March 2026

मथुरा के फालैन में अनोखा होलिका दहन, धधकती आग से सकुशल निकले संजू पंडा

मथुरा | 3 मार्च 2026


मथुरा जिले के फालैन गांव में हर साल होने वाला अनोखा होलिका दहन इस बार भी आस्था और परंपरा का अद्भुत दृश्य बना। मंगलवार सुबह करीब चार बजे, एक माह की कठिन तपस्या के बाद संजू पंडा 20 फीट ऊंची धधकती होलिका की आग से सकुशल बाहर निकले। जैसे ही वह अग्नि से बाहर आए, पूरा गांव भक्त प्रह्लाद के जयकारों से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचे।


यह परंपरा कई दशकों से चली आ रही है, जिसमें फालैन सहित आसपास के 11 गांवों की होलिका एक साथ जलाई जाती है। परंपरा के अनुसार, पंडा समाज का एक युवक आग से होकर गुजरता है। इस वर्ष लगातार दूसरी बार संजू पंडा ने यह कठिन जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने एक माह पहले घर त्यागकर गांव के बाहर स्थित प्रह्लाद मंदिर में तपस्या शुरू की थी। बीते 24 घंटों से गांव में अखंड हवन और पूजा-पाठ चल रहा था।


होलिका दहन से पहले संजू पंडा ने मंदिर में जलते दीपक पर अपनी हथेली रखी। जब हथेली को शीतलता का अनुभव हुआ, तो इसे अग्नि परीक्षा का संकेत माना गया। इसके बाद गांव समिति ने सजी हुई विशाल होलिका में अग्नि प्रज्वलित की। संजू पंडा ने पहले प्रह्लाद कुंड में स्नान किया और फिर सीधे धधकती होलिका में प्रवेश किया।


आग से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद संजू पंडा ने इसे भक्त प्रह्लाद की कृपा बताया। उन्होंने कहा कि प्रह्लाद की माला धारण कर अग्नि में प्रवेश किया जाता है और वही इस कठिन परीक्षा में रक्षा करते हैं। फालैन का यह होलिका दहन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और विश्वास की जीवंत मिसाल भी है।

 मथुरा के फालैन में अनोखा होलिका दहन, धधकती आग से सकुशल निकले संजू पंडा


मथुरा जिले के फालैन गांव में हर साल होने वाला अनोखा होलिका दहन इस बार भी आस्था और परंपरा का अद्भुत दृश्य बना। मंगलवार सुबह करीब चार बजे, एक माह की कठिन तपस्या के बाद संजू पंडा 20 फीट ऊंची धधकती होलिका की आग से सकुशल बाहर निकले। जैसे ही वह अग्नि से बाहर आए, पूरा गांव भक्त प्रह्लाद के जयकारों से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचे।


यह परंपरा कई दशकों से चली आ रही है, जिसमें फालैन सहित आसपास के 11 गांवों की होलिका एक साथ जलाई जाती है। परंपरा के अनुसार, पंडा समाज का एक युवक आग से होकर गुजरता है। इस वर्ष लगातार दूसरी बार संजू पंडा ने यह कठिन जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने एक माह पहले घर त्यागकर गांव के बाहर स्थित प्रह्लाद मंदिर में तपस्या शुरू की थी। बीते 24 घंटों से गांव में अखंड हवन और पूजा-पाठ चल रहा था।


होलिका दहन से पहले संजू पंडा ने मंदिर में जलते दीपक पर अपनी हथेली रखी। जब हथेली को शीतलता का अनुभव हुआ, तो इसे अग्नि परीक्षा का संकेत माना गया। इसके बाद गांव समिति ने सजी हुई विशाल होलिका में अग्नि प्रज्वलित की। संजू पंडा ने पहले प्रह्लाद कुंड में स्नान किया और फिर सीधे धधकती होलिका में प्रवेश किया।


आग से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद संजू पंडा ने इसे भक्त प्रह्लाद की कृपा बताया। उन्होंने कहा कि प्रह्लाद की माला धारण कर अग्नि में प्रवेश किया जाता है और वही इस कठिन परीक्षा में रक्षा करते हैं। फालैन का यह होलिका दहन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और विश्वास की जीवंत मिसाल भी है।


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