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बसंत पंचमी 2026: सिर्फ बसंत पंचमी ही नहीं, हिंदू पंचांग की ये 5 तिथियां भी हैं ‘अबूझ मुहूर्त’

नई दिल्ली | 20 जनवरी 2026


हिंदू धर्म में किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य से पहले मुहूर्त देखना परंपरा का अहम हिस्सा माना जाता है| लेकिन पंचांग में कुछ विशेष तिथियां ऐसी भी होती हैं, जिन्हें अबूझ मुहूर्त कहा जाता है| इन दिनों विवाह, गृह प्रवेश, निर्माण कार्य या किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती| ऐसी ही प्रमुख तिथियों में बसंत पंचमी का विशेष स्थान है, जो वर्ष 2026 में 23 जनवरी को मनाई जाएगी|


बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा का खास महत्व होता है| इसे वर्ष का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त भी माना जाता है| मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य बिना किसी बाधा के सफल होता है| इसी कारण विवाह, नए काम की शुरुआत, पढ़ाई या निर्माण कार्य इस दिन बेझिझक किए जा सकते हैं| बसंत पंचमी के अलावा भी हिंदू कैलेंडर में कुछ और तिथियां हैं, जो अपने आप में पूर्ण शुभ मानी जाती हैं|


इनमें पहली है फुलेरा दूज, जो फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आती है| वर्ष 2026 में यह पर्व 19 फरवरी को मनाया जाएगा. इस दिन श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा की जाती है और विवाह व गृह प्रवेश के लिए यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है| दूसरी प्रमुख तिथि अक्षय तृतीया है, जो 19 अप्रैल 2026 को पड़ेगी| इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है और माना जाता है कि इस दिन किया गया दान, निवेश या नई शुरुआत कभी निष्फल नहीं होती|


इसके अलावा गंगा दशहरा 25 मई 2026 को मनाया जाएगा, जो मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का पर्व है| इस दिन स्नान और दान के साथ शुभ कार्यों की शुरुआत भी उत्तम मानी जाती है| भड़ली नवमी 22 जुलाई 2026 को पड़ेगी, जिसे ज्योतिष में पूर्ण शुभ मुहूर्त माना गया है| वहीं, देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026 को होगी, जब भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं और इसके साथ ही विवाह समेत सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है| इन सभी तिथियों पर बिना पंचांग देखे शुभ कार्य किए जा सकते पंचांग देखे बिना करें शुभ कार्य, जानिए हिंदू कैलेंडर की 5 खास तिथियां


हिंदू धर्म में शुभ कार्य करने से पहले मुहूर्त देखने की परंपरा रही है, लेकिन पंचांग में कुछ तिथियां ऐसी भी होती हैं जिन्हें अबूझ मुहूर्त कहा जाता है| इन दिनों विवाह, गृह प्रवेश, निर्माण कार्य या किसी नए काम की शुरुआत के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती| ऐसी ही तिथियों में बसंत पंचमी का विशेष महत्व है, जो वर्ष 2026 में 23 जनवरी को मनाई जाएगी|


बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा का खास महत्व बताया गया है| इसे वर्ष का सबसे शुभ दिन भी माना जाता है | मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य बिना किसी बाधा के सफल होते हैं| इसी कारण लोग इस दिन विवाह, शिक्षा से जुड़े कार्य, नया व्यवसाय या निर्माण कार्य बेझिझक करते हैं| बसंत पंचमी के अलावा भी हिंदू कैलेंडर में कुछ अन्य तिथियां हैं, जो अपने आप में पूर्ण शुभ मानी जाती हैं|


फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज मनाई जाती है, जो 2026 में 19 फरवरी को पड़ेगी| यह दिन भी अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में आता है और इस दिन विवाह व गृह प्रवेश को बहुत शुभ माना जाता है| इसके बाद वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया मनाई जाती है, जो 19 अप्रैल 2026 को होगी| इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा होती है और माना जाता है कि इस दिन किया गया दान और नई शुरुआत कभी निष्फल नहीं होती|


इसी तरह ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है, जो 25 मई 2026 को पड़ेगा |  इस दिन स्नान और दान के साथ शुभ कार्य शुरू करना भी उत्तम माना गया है | आषाढ़ शुक्ल नवमी यानी भड़ली नवमी 22 जुलाई 2026 को होगी, जो पूर्ण शुभ मुहूर्त मानी जाती है. वहीं कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी एकादशी मनाई जाती है, जो 20 नवंबर 2026 को पड़ेगी | इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं और इसके साथ ही सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है|

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