Monday, 05 January 2026

चंडीगढ़ में बढ़ता टीबी का खतरा, हर दिन सामने आ रहे नए मरीज, शुरुआती लक्षणों की अनदेखी पड़ रही भारी

चंडीगढ़ | जनवरी 2026


उत्तर भारत में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पहचाने जाने वाले चंडीगढ़ में अब टीबी (तपेदिक) एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की राज्यसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, शहर में प्रतिदिन औसतन 19 नए टीबी मरीज सामने आ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि चंडीगढ़ में हर 208वां व्यक्ति टीबी से पीड़ित है, जो बेहद चिंताजनक आंकड़ा माना जा रहा है।


रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में अक्टूबर तक चंडीगढ़ में कुल 5,765 टीबी मरीज दर्ज किए गए। यह स्थिति तब है, जब शहर को देश की ‘मॉडल हेल्थ सिटी’ के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है और यहां पीजीआई, जीएमसीएच-32 और सेक्टर-16 जैसे बड़े और प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान मौजूद हैं। इसके बावजूद संक्रमण की रफ्तार पर काबू नहीं पाया जा सका है।


केंद्र सरकार के निर्देश पर पिछले वर्ष चलाया गया 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान भी अपेक्षित परिणाम देने में असफल रहा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस अभियान के बावजूद लोगों में जागरूकता की कमी बनी हुई है, जिसके कारण समय पर जांच और इलाज नहीं हो पा रहा।


आंकड़ों के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों में टीबी का खतरा सबसे ज्यादा है। वहीं, 46 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों में भी संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। चिंताजनक बात यह है कि 0 से 14 वर्ष आयु वर्ग के करीब 3.2 प्रतिशत बच्चे भी टीबी से प्रभावित पाए गए हैं।


डॉक्टरों का कहना है कि लोग टीबी के शुरुआती लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक खांसी रहना, कफ में खून आना, सीने में दर्द, लगातार थकान और वजन कम होना जैसे लक्षणों को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। देर से जांच होने पर बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच जाती है, जिससे इलाज और अधिक कठिन हो जाता है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने टीबी से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। बच्चों को जन्म के एक महीने के भीतर बीसीजी का टीका लगवाना जरूरी है। टीबी मरीजों को दूसरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए, खांसते या छींकते समय मुंह ढकना चाहिए और सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचना चाहिए। इसके साथ ही, स्वस्थ आहार, नियमित योग, स्वच्छता और समय पर डॉक्टर से परामर्श ही टीबी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।


चंडीगढ़ में टीबी का बढ़ता खतरा, रोज़ मिल रहे नए मरीज, लक्षणों की अनदेखी बन रही बड़ी वजह



देश की बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाओं वाले शहरों में गिने जाने वाले चंडीगढ़ में तपेदिक (टीबी) का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की राज्यसभा में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, शहर में हर दिन औसतन 19 नए टीबी के मामले सामने आ रहे हैं। मौजूदा हालात बताते हैं कि चंडीगढ़ में लगभग हर 208वां व्यक्ति इस बीमारी से प्रभावित है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।


रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में अक्टूबर तक शहर में 5,765 टीबी मरीज दर्ज किए गए। यह आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं, जब चंडीगढ़ को लंबे समय से ‘मॉडल हेल्थ सिटी’ के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। पीजीआई, जीएमसीएच-32 और सेक्टर-16 जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों की मौजूदगी के बावजूद टीबी के मामलों में कमी नहीं आ पाई है।


पिछले वर्ष केंद्र सरकार के निर्देश पर चलाया गया 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान भी संक्रमण की रफ्तार को रोकने में नाकाम रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी और समय पर जांच न होना इसकी प्रमुख वजह है।


आंकड़ों के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में टीबी का जोखिम सबसे ज्यादा है। इसके साथ ही 46 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों में भी संक्रमण तेजी से फैल रहा है। चिंता की बात यह है कि 0 से 14 वर्ष आयु वर्ग के करीब 3.2 प्रतिशत बच्चे भी टीबी की चपेट में हैं।


डॉक्टरों के अनुसार, टीबी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना सबसे बड़ा खतरा है। लगातार खांसी, कफ में खून आना, सीने में दर्द, कमजोरी और वजन कम होना जैसे संकेतों को मामूली समझने से बीमारी गंभीर स्तर तक पहुंच जाती है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने टीबी से बचाव के लिए सतर्कता बरतने की अपील की है। बच्चों को समय पर बीसीजी टीकाकरण कराना, मरीजों को दूसरों से दूरी बनाए रखना, खांसते-छींकते समय मुंह ढकना और स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी बताया गया है। समय पर डॉक्टर से सलाह, संतुलित आहार और नियमित योग से टीबी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


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