आलू के दामों में तेज गिरावट से किसान परेशान, निर्यात और प्रोसेसिंग यूनिट की उठी मांग

आगरा | 22 जनवरी 2026


जनपद में आलू के लगातार गिरते दामों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेती में हर साल बढ़ती लागत के मुकाबले आलू के भाव तेजी से नीचे जाने से किसान निराश हैं। किसानों का कहना है कि मौजूदा हालात में खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। ऐसे में उन्होंने आलू को विदेशों में निर्यात करने की ठोस व्यवस्था करने और जनपद में प्रोसेसिंग यूनिट को जल्द शुरू कराने की मांग की है। यह मुद्दा बुधवार को विकास भवन में आयोजित किसान दिवस के दौरान प्रमुखता से उठाया गया।


किसानों ने बताया कि अगले महीने से नई फसल की खुदाई शुरू हो जाएगी, लेकिन अभी तक पुराना आलू कोल्ड स्टोरेज से बाहर नहीं निकल पाया है। व्यापारियों द्वारा इस समय किसानों से आलू मात्र 300 से 500 रुपये प्रति पैकेट में खरीदा जा रहा है, जिससे लागत तक निकलना मुश्किल हो गया है। किसान नेता मोहन सिंह चाहर ने कहा कि पहले कई देशों में जनपद से आलू का निर्यात होता था, लेकिन इस बार विदेशों में आलू नहीं भेजा गया। प्रोसेसिंग यूनिट के अभाव में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।


किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने कहा कि पुराना आलू अभी भी शीतगृहों में रखा है, क्योंकि उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। कोल्ड स्टोरेज का खर्च चुकाने के बाद किसानों के हाथ कुछ नहीं बच रहा। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाली आलू की फसल भी घाटे में जाएगी। वहीं राजीव लवानिया ने कहा कि किसानों को खाद और बीज के लिए भटकना पड़ता है और तय दाम से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है, लेकिन फसल बेचने पर लागत निकलने की कोई गारंटी नहीं रहती। उन्होंने जिला प्रशासन से आलू निर्यात की ठोस योजना बनाकर शासन को भेजने की मांग की।


किसान दिवस में किसानों ने विभिन्न विभागों से जुड़ी कुल 12 शिकायतें भी दर्ज कराईं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं पीडी रेनु कुमारी ने संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शिकायतों के निस्तारण के निर्देश दिए। किसान लाखन सिंह त्यागी ने कहा कि शाम पांच बजे के बाद ट्यूबवेल की बिजली काट दी जाती है, जिससे खेतों में रुकना मुश्किल हो जाता है और चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस मौके पर उप निदेशक कृषि मुकेश कुमार, कृषि अधिकारी विनोद कुमार, सीवीओ डॉ. डीके पांडे, एक्सईएन सिंचाई नीरज कुमार सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


आलू के दाम लुढ़के, लागत बढ़ी: किसान बोले– अब निर्यात ही आखिरी रास्ता


जनपद में आलू के भाव में आई भारी गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेत से मंडी तक बढ़ती लागत के बीच किसानों को अपनी फसल के सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं। इस समय आलू 300 से 500 रुपये प्रति पैकेट में बिक रहा है, जिससे किसान बेहद निराश हैं। किसानों का कहना है कि मेहनत के बावजूद आमदनी घटती जा रही है और खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है।


किसानों ने बताया कि अगले महीने से नई फसल की खुदाई शुरू हो जाएगी, लेकिन अभी तक पुराना आलू कोल्ड स्टोरेज से बाहर नहीं निकल पाया है। सही मूल्य न मिलने के कारण शीतगृहों में रखा आलू किसानों पर अतिरिक्त बोझ बन गया है। किसान नेताओं का कहना है कि पहले जनपद से कई देशों में आलू का निर्यात होता था, लेकिन इस बार ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।


बुधवार को विकास भवन में आयोजित किसान दिवस में किसानों ने एकजुट होकर मांग उठाई कि जनपद से आलू के विदेश निर्यात की ठोस व्यवस्था की जाए और प्रोसेसिंग यूनिट को जल्द शुरू किया जाए। किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने कहा कि कोल्ड स्टोरेज का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। यदि हालात ऐसे ही रहे तो आने वाली फसल भी घाटे में जाएगी और किसानों की स्थिति और कमजोर हो जाएगी।


किसान दिवस के दौरान किसानों ने अलग-अलग विभागों से जुड़ी 12 शिकायतें भी रखीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं पीडी रेनु कुमारी ने संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर समाधान के निर्देश दिए। किसानों ने बिजली कटौती, महंगे खाद-बीज और पशुओं की बीमारियों का मुद्दा भी उठाया। बैठक में कृषि, पशुपालन और सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

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