Deepawali 2026: दीपावली पर कितने दीपक जलाने चाहिए? कहां-कहां जलाते हैं ये दीप? जानिए परंपरा
Deepawali 2026: दीपावली का त्योहार रोशनी, खुशियों और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घरों को दीपों से सजाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि दीपक जलाने से घर का अंधकार दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली का आगमन होता है। दीपावली की रात लोग अपने घर के मुख्य द्वार से लेकर पूजा स्थल, आंगन, तुलसी चौरा और छत तक दीपक जलाते हैं।
आइए जानते हैं दीपावली पर कितने दीपक जलाना शुभ माना जाता है? इन्हें घर में किन-किन स्थानों पर रखना चाहिए और दीप जलाने के पीछे कौनसी धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं?
दीपावली पर कितने दीपक जलाना शुभ माना जाता है?
दीपावली पर दीपक जलाने की कोई एक निश्चित संख्या सभी परिवारों या परंपराओं के लिए अनिवार्य नहीं मानी जाती। अलग-अलग क्षेत्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपक जलाने की संख्या में अंतर हो सकता है। सामान्य तौर पर लोग 5, 11, 21, 51 या 108 दीपक जलाना शुभ मानते हैं।
5 दीपक पंचतत्व यानी पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के प्रतीक के रूप में जलाए जाते हैं। इन्हें पूजा स्थल, मुख्य द्वार और घर के प्रमुख स्थानों पर रखा जा सकता है।
धार्मिक परंपराओं में 11 की संख्या को शुभ माना जाता है। कुछ मान्यताओं में इसका संबंध एकादश रुद्र से भी जोड़ा जाता है।
21 दीपक जलाना मंगल, शुभता और समृद्धि की कामना का प्रतीक माना जाता है। कई परिवार इस संख्या में दीपक जलाकर घर को रोशन करते हैं।
51 की संख्या को शक्ति उपासना और देवी परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। इस संख्या में दीप जलाना कुछ परिवारों की विशेष धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
हिंदू धर्म में 108 की संख्या का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। मंत्र-जप और पूजा-पाठ में भी इस संख्या का उपयोग किया जाता है। कुछ लोग दीपावली पर 108 दीपक जलाकर सुख-शांति और मंगल की कामना करते हैं।
दीपावली पर घर में कहां-कहां जलाने चाहिए दीपक?
दीपावली की शाम घर के मुख्य दरवाजे पर दीपक जलाना विशेष शुभ माना जाता है। मान्यता है कि रोशनी से सजा द्वार माता लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक होता है। कई परिवार दरवाजे के दोनों ओर दीपक रखते हैं और रंगोली के पास भी दीए सजाते हैं।
दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा के दौरान पूजा स्थल पर दीपक जलाना महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा के समय घी या तेल का दीपक जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की जाती है। मंदिर में अखंड ज्योति जलाने की परंपरा भी कई घरों में प्रचलित है।
हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को पवित्र और पूजनीय माना गया है। दीपावली की शाम तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मकता और सुख-शांति बनी रहती है।
जिन घरों में आंगन है, वहां दीपावली की रात दीपक सजाने की परंपरा काफी पुरानी है। आंगन में दीपों की कतार लगाने से घर का वातावरण उत्सवमय हो जाता है। रंगोली के आसपास भी छोटे-छोटे दीए रखे जा सकते हैं।
रसोई को घर की समृद्धि और अन्नपूर्णा से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए कुछ परिवार दीपावली पर रसोई में भी दीपक जलाते हैं। इसे अन्न और भोजन के प्रति सम्मान तथा घर में अन्न-धन की निरंतरता की कामना का प्रतीक माना जाता है।
दीपावली पर खिड़कियों, बालकनी और घर की बाहरी दीवारों पर दीपक रखने से घर चारों ओर से जगमगाता है। परंपरागत मिट्टी के दीयों के साथ लोग इन स्थानों पर सजावटी रोशनी का भी इस्तेमाल करते हैं।
कई परिवार दीपावली की रात छत पर दीपक जलाते हैं। पहले के समय में घरों की छतों और ऊंचे स्थानों पर दीप जलाने से दूर तक रोशनी दिखाई देती थी।
वास्तु मान्यताओं में उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को पूजा और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। कुछ लोग इस दिशा में भी दीपक जलाते हैं।
दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के समय तिजोरी, अलमारी या धन रखने के स्थान के पास दीपक जलाने की भी परंपरा है। इसे धनधान्य की वृद्धि और आर्थिक स्थिरता की कामना से जोड़कर देखा जाता है।
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