अखिर क्यों मिलाई जाती है वेश्या के आंगन की मिट्टी माँ दुर्गा की मूर्ति में?
दादी की अस्थियां देख भावुक हुए CJP संस्थापक अभिजीत दीपके
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026
महाराष्ट्र के हिंगोली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके अपनी दिवंगत दादी सावित्रीबाई शंकर दीपके की अस्थियां देखने के बाद भावुक हो गए। दिल्ली पुलिस की हिरासत के कारण वह दादी के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए थे। बाद में पैतृक गांव पहुंचकर जब उन्होंने श्मशान घाट पर अस्थियों पर फूल चढ़ाए, तो वह अपने आंसू नहीं रोक सके। इस घटना के बाद उनकी हिरासत और रिहाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
अभिजीत दीपके की 85 वर्षीय दादी सावित्रीबाई शंकर दीपके का लंबी बीमारी के बाद महाराष्ट्र के संतुक पिंपरी गांव में निधन हो गया था। उस समय अभिजीत नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल थे। बिना आधिकारिक अनुमति के प्रदर्शन करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने उन्हें और पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था। इसी दौरान उन्हें दादी के निधन की सूचना मिली, जिसके कारण वह अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके।
अभिजीत दीपके की हिरासत को लेकर दिल्ली पुलिस और CJP नेताओं के बीच विवाद सामने आया है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि उन्हें दादी के निधन की जानकारी तत्काल दे दी गई थी और महाराष्ट्र लौटने के लिए यात्रा की व्यवस्था करने की पेशकश भी की गई थी। वहीं, अभिजीत के परिवार और सहयोगियों का आरोप है कि कानूनी औपचारिकताओं और प्रशासनिक देरी के कारण उनकी रिहाई समय पर नहीं हो सकी। उनका कहना है कि इसके चलते अभिजीत अपनी दादी को अंतिम विदाई देने से वंचित रह गए।
रविवार सुबह मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद अभिजीत दीपके को रिहा कर दिया गया। इसके बाद वह विमान से महाराष्ट्र पहुंचे और सीधे अपने पैतृक गांव रवाना हुए। श्मशान घाट पहुंचकर दादी की अस्थियों पर फूल चढ़ाते समय वह भावुक हो गए और फूट-फूटकर रोने लगे। वहां मौजूद परिजनों और स्थानीय समर्थकों ने उन्हें सांत्वना दी।
इस घटना के बाद मानवीय परिस्थितियों में पुलिस की निवारक हिरासत की कार्रवाई और उसकी सीमाओं को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग ऐसी परिस्थितियों में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रशासन के समर्थक कानूनी प्रक्रिया के पालन को आवश्यक बता रहे हैं। CJP ने कहा है कि पार्टी अपने अभियान जारी रखेगी। वहीं, अभिजीत दीपके अगले कुछ दिनों तक गांव में रहकर परिवार के साथ शोक संबंधी रस्में पूरी करेंगे।
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