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Thursday, 09 July 2026

समुद्री सहयोग से लेकर यूपीआई तक, भारत-इंडोनेशिया ने कई अहम समझौतों पर किए हस्ताक्षर

जकार्ता। भारत और इंडोनेशिया ने मंगलवार को समुद्री सुरक्षा, रक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, महत्वपूर्ण खनिज और डिजिटल भुगतान जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई गति देना और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और इंडोनेशिया समुद्री पड़ोसी होने के साथ-साथ रणनीतिक साझेदार भी हैं। दोनों नेताओं ने रक्षा और समुद्री सहयोग को और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।


इसके साथ ही, दोनों देशों ने ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली और एयर-टू-एयर मिसाइल सहयोग समझौते के जरिए रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने का स्वागत किया। समुद्री क्षेत्र में भी दोनों देशों ने मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (एमडीए), समुद्री संपर्क, तटीय निगरानी, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर), प्रदूषण नियंत्रण और खोज एवं बचाव (एसएआर) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं का मानना है कि यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करेगा। बयान में कहा गया है कि भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री सुरक्षा एवं सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन (एमओयू) के नवीनीकरण और इंडोनेशिया की समुद्री सुरक्षा एजेंसी बाकामला आरआई तथा भारतीय तटरक्षक बल के बीच कार्यान्वयन व्यवस्था का भी स्वागत किया। दोनों देशों ने रक्षा उद्योगों के बीच संयुक्त उत्पादन, तकनीक हस्तांतरण, तकनीकी सहायता, क्षमता निर्माण, जहाज निर्माण, रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, रखरखाव एवं मरम्मत (एमआरओ) सुविधाओं की स्थापना, रक्षा अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) और रक्षा आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने पर भी सहमति जताई।


इसके अलावा, दोनों नेताओं ने सैन्य चिकित्सा संस्थानों के बीच दवाइयों की आपूर्ति को लेकर हो रही प्रगति का भी स्वागत किया। दोनों नेताओं ने माना कि भारत के 'विकसित भारत 2047' और इंडोनेशिया के 'इंडोनेशिया एमास 2045' विजन के बीच व्यापक आर्थिक सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। इसी दिशा में उन्होंने आसियान-भारत व्यापार समझौते (एआईटीआईजीए) की समीक्षा को जल्द पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि दोनों देशों के बीच संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापारिक वातावरण तैयार हो सके। इसके बाद दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को और गहरा करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।



दोनों पक्षों ने 2026 में वर्किंग ग्रुप ऑन ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट (डब्ल्यूजीटीआई) की दूसरी बैठक, बाइएनियल ट्रेड मिनिस्टर्स फोरम (बीटीएमएफ) की चौथी बैठक और जॉइंट इकोनॉमिक एंड फाइनेंशियल डायलॉग (ईएफडी) की पहली बैठक आयोजित करने पर भी सहमति व्यक्त की। भारत और इंडोनेशिया ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। दोनों देशों का लक्ष्य घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए विविध और सुरक्षित सप्लाई चेन विकसित करना है।


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