राष्ट्रपति ने किया सम्मानित: लखनऊ के वीर सपूत मेजर आदित्य को मिला "शौर्य" चक्र

लखनऊ। राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों की परवाह किए बिना अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने वाले सैनिकों को देश सदैव सम्मान की दृष्टि से देखता है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस वर्ष लखनऊ के वीर सपूत मेजर आदित्य प्रताप सिंह को देश के प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार शौर्य चक्र से सम्मानित किया है।

यह सम्मान केवल एक सैनिक की बहादुरी का पुरस्कार नहीं, बल्कि उस संस्कार, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का भी सम्मान है, जिसने एक युवा को देश की सेवा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने की प्रेरणा दी।

मेजर आदित्य प्रताप सिंह ने भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में वर्ष 2014 में कमीशन प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने विभिन्न चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सेवा देते हुए अनेक आतंकवाद-रोधी अभियानों का सफल नेतृत्व किया। वर्ष 2021 में आतंकवादियों के विरुद्ध उत्कृष्ट सैन्य अभियानों के लिए उन्हें सेना मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है। अब शौर्य चक्र प्राप्त कर उन्होंने न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे लखनऊ और उत्तर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

लखनऊ के ए.पी.एस. एकेडमी, सेनानी विहार से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने वाले मेजर आदित्य ने स्नातक की शिक्षा दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूरी की। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि बड़े सपने केवल महानगरों में नहीं, बल्कि संस्कारों और संकल्प से भरे घरों में जन्म लेते हैं।

मेजर आदित्य प्रताप सिंह ऐसे परिवार से आते हैं, जिसकी नसों में राष्ट्रभक्ति प्रवाहित होती है। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर भारत सिंह के प्रपौत्र तथा शिवगुलाम सिंह के पौत्र हैं। बचपन से ही अपने बाबा और नाना मेजर दुर्गा सिंह के साहस, अनुशासन और देशसेवा की कहानियों ने उनके मन में राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना जगाई। उन्हीं आदर्शों का अनुसरण करते हुए उन्होंने अपना जीवन मातृभूमि की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया।

आज जब देश का युवा अनेक अवसरों और चुनौतियों के बीच अपना मार्ग तलाश रहा है, तब मेजर आदित्य प्रताप सिंह की जीवन यात्रा एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आती है। उनका संदेश स्पष्ट है कि सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों में नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को निभाने में भी निहित है।

शौर्य चक्र से सम्मानित मेजर आदित्य यह सिद्ध करते हैं कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन, परिश्रम और देशभक्ति के बल पर कोई भी युवा असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है। उनकी उपलब्धि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों या अन्य राष्ट्रीय सेवाओं के माध्यम से देश की सेवा का सपना देखते हैं।

मेजर आदित्य प्रताप सिंह की यह गौरवगाथा केवल एक सैनिक की कहानी नहीं, बल्कि उस भारत की कहानी है, जहां नई पीढ़ी आज भी राष्ट्र को सर्वोपरि मानकर अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ रही है। लखनऊ का यह वीर सपूत आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, समर्पण और राष्ट्रप्रेम का जीवंत प्रतीक बन गया है। 

"युवा यदि लक्ष्य, अनुशासन और राष्ट्रहित को अपने जीवन का आधार बना लें, तो हर घर से एक मेजर आदित्य प्रताप सिंह निकल सकता है।"

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