राजसत्ता से ऋषित्व तक की महागाथा: तप की शक्ति, संकल्प का शिखर- ‘ब्रह्मऋषि विश्वामित्र’ से गूंजेगा रंगमंच

नई दिल्ली (रितेश सिन्हा) भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों की गहराई को रंगमंच के माध्यम से प्रस्तुत करने की दिशा में आर्ट्स न्यू वे ऑर्गेनाइजेशन एक भव्य नाट्य प्रस्तुति ‘ब्रह्मऋषि विश्वामित्र’ लेकर आ रहा है।दिल्ली के प्रतिष्ठित त्रिवेणी कला संगम के  ओपन थिएटर में आयोजित यह नाटक एक ऐसे असाधारण चरित्र की कथा है, जिसने राजसी वैभव का त्याग कर कठोर तपस्या और अटूट संकल्प के बल पर ब्रह्मऋषि का सर्वोच्च पद प्राप्त किया।

इस नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन प्रख्यात रंगकर्मी कुलदीप वशिष्ठ द्वारा किया गया है, जिनका रंगमंच और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में समृद्ध अनुभव रहा है। 10 से अधिक डॉक्यूमेंट्री, 25 शॉर्ट फिल्मों और अनेक चर्चित नाटकों के निर्देशन के साथ-साथ 100 से अधिक नाटकों में अभिनय और 30 से अधिक नाटकों के सफल निर्देशन का उनका अनुभव इस प्रस्तुति को विशेष ऊंचाई प्रदान करता है।

‘ब्रह्मऋषि विश्वामित्र’ नाटक में महर्षि विश्वामित्र के जीवन के प्रमुख प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया जाएगा- राजा कौशिक से ब्रह्मऋषि बनने की यात्रा, ऋषि वशिष्ठ के साथ उनका संघर्ष, कठोर तपस्या, मेनका प्रसंग, त्रिशंकु स्वर्ग की रचना तथा भगवान राम-लक्ष्मण के गुरु के रूप में उनकी भूमिका। यह प्रस्तुति केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मबल, त्याग, धैर्य और आध्यात्मिक उत्कर्ष का जीवंत संदेश है।

नाटक में प्रमुख भूमिकाओं में कुलदीप वशिष्ठ (विश्वामित्र एवं एक्ट डायरेक्टर), शिवा (विश्वामित्र), खुशबू राजपूत (मेनका), राजीव शर्मा (ब्रह्मा) और अकबर वशिष्ठ नजर आएंगे। इनके साथ रितिक शर्मा (इंद्र), बृज गुप्ता (नारद), लवी चौधरी (ऋषि पत्नी), गौरव काकरण (त्रिशंकु) और अभिषेक (नंदी) जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

प्रस्तुति के विशेष आकर्षण के रूप में ‘नर्तकी’ खंड में नृत्य प्रस्तुति दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगी, जिसमें गर्गी, रजनी डोगरा, लक्षिका, बीना बंसल (डायरेक्टर) और रिचा अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी। अभिनय, नृत्य और संगीत का यह समन्वय प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली और आकर्षक बनाएगा।

तकनीकी और प्रबंधन टीम में नवीन सेठी (सेनापति), शोएब (सैनिक), सन्नी (सैनिक), सपन आचार्य (डायरेक्टर) और रिजवान रज़ा (स्टेज मैनेजर) की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी, जो मंच संचालन और प्रस्तुति की गुणवत्ता को सुनिश्चित करेंगे।

निर्देशक मंडल का कहना है कि यह नाट्य प्रस्तुति केवल एक कहानी नहीं, बल्कि भारतीय पौराणिक परंपरा, संस्कृति और मानवीय भावनाओं का जीवंत चित्रण है। ‘नर्तकी’ खंड के माध्यम से दर्शकों को एक ऐसा अनुभव मिलेगा, जिसमें रंगमंच की विविध कलाओं का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

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