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Wednesday, 25 February 2026

यूजीसी बिल से लेकर मिशन 2027 तक: यूपी की राजनीति में हलचल, भीतर की बेचैनी और नई सियासी चालें

उत्तर प्रदेश | 25 फरवरी 2026


उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों कई मोर्चों पर गरमाई हुई है। यूजीसी (UGC) बिल को लेकर जहां भारतीय जनता पार्टी के भीतर असहजता साफ दिख रही है, वहीं विपक्षी दल समाजवादी पार्टी इसे बड़े राजनीतिक मौके के तौर पर देख रही है। इसी कड़ी में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बयान, अखिलेश यादव की नई रणनीति और 2027 की तैयारियां सुर्खियों में हैं।


यूजीसी बिल पर भाजपा के अंदर उठते सवाल अब खुलकर सामने आने लगे हैं। उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने सवर्ण समाज के विरोध पर चिंता जताते हुए चेतावनी दी कि अगर ओबीसी और एससी वर्ग इस मुद्दे को अपने खिलाफ मानकर एकजुट हो गया, तो पार्टी को चुनावी नुकसान हो सकता है। उन्होंने इस विवाद को बढ़ने से रोकने की सलाह दी। वहीं पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने जमीनी हालात का जिक्र करते हुए कहा कि इस बिल का विरोध गांव-गांव में फैल चुका है और सिर्फ सवर्ण ही नहीं, बल्कि पिछड़ा और दलित समाज भी इससे संतुष्ट नहीं है। इसी बीच संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कानून में सुधार की गुंजाइश की बात कहकर बीच का रास्ता अपनाने का संकेत दिया।


दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा को उसी के राजनीतिक मैदान में घेरने की तैयारी कर ली है। उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘"भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ"’ का नारा देकर सॉफ्ट हिंदुत्व की ओर कदम बढ़ाया है। अखिलेश यादव का मानना है कि शंकराचार्य से जुड़े विवादों के बाद भाजपा का एक पारंपरिक समर्थक वर्ग नाराज है। इसी वर्ग को साधने के लिए सपा अब ‘सनातन’ के मुद्दे पर भाजपा को चुनौती दे रही है और धार्मिक भावनाओं को नए सियासी संदर्भ में पेश कर रही है।


मिशन 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी अब पूरी तरह चुनावी मोड में नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव को निर्णायक मानते हुए सपा पेशेवर चुनावी रणनीति की ओर बढ़ रही है। इसी क्रम में राजनीतिक रणनीति बनाने वाली संस्था I-PAC के साथ संभावित साझेदारी पर चर्चा तेज है। लखनऊ में अखिलेश यादव के सामने चुनावी नारे, टिकट चयन के सर्वे और डिजिटल कैंपेन को लेकर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अखिलेश को आई-पैक के अनुभव का लाभ लेने की सलाह दी थी। भाजपा को 2027 में कड़ी चुनौती देने के लिए सपा अब हर मोर्चे पर रणनीति मजबूत करने में जुटी है।

 यूजीसी बिल से लेकर मिशन 2027 तक: यूपी की राजनीति में हलचल, भीतर की बेचैनी और नई सियासी चालें


उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों कई मोर्चों पर गरमाई हुई है। यूजीसी (UGC) बिल को लेकर जहां भारतीय जनता पार्टी के भीतर असहजता साफ दिख रही है, वहीं विपक्षी दल समाजवादी पार्टी इसे बड़े राजनीतिक मौके के तौर पर देख रही है। इसी कड़ी में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बयान, अखिलेश यादव की नई रणनीति और 2027 की तैयारियां सुर्खियों में हैं।


यूजीसी बिल पर भाजपा के अंदर उठते सवाल अब खुलकर सामने आने लगे हैं। उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने सवर्ण समाज के विरोध पर चिंता जताते हुए चेतावनी दी कि अगर ओबीसी और एससी वर्ग इस मुद्दे को अपने खिलाफ मानकर एकजुट हो गया, तो पार्टी को चुनावी नुकसान हो सकता है। उन्होंने इस विवाद को बढ़ने से रोकने की सलाह दी। वहीं पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने जमीनी हालात का जिक्र करते हुए कहा कि इस बिल का विरोध गांव-गांव में फैल चुका है और सिर्फ सवर्ण ही नहीं, बल्कि पिछड़ा और दलित समाज भी इससे संतुष्ट नहीं है। इसी बीच संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कानून में सुधार की गुंजाइश की बात कहकर बीच का रास्ता अपनाने का संकेत दिया।


दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा को उसी के राजनीतिक मैदान में घेरने की तैयारी कर ली है। उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘"भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ"’ का नारा देकर सॉफ्ट हिंदुत्व की ओर कदम बढ़ाया है। अखिलेश यादव का मानना है कि शंकराचार्य से जुड़े विवादों के बाद भाजपा का एक पारंपरिक समर्थक वर्ग नाराज है। इसी वर्ग को साधने के लिए सपा अब ‘सनातन’ के मुद्दे पर भाजपा को चुनौती दे रही है और धार्मिक भावनाओं को नए सियासी संदर्भ में पेश कर रही है।


मिशन 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी अब पूरी तरह चुनावी मोड में नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव को निर्णायक मानते हुए सपा पेशेवर चुनावी रणनीति की ओर बढ़ रही है। इसी क्रम में राजनीतिक रणनीति बनाने वाली संस्था I-PAC के साथ संभावित साझेदारी पर चर्चा तेज है। लखनऊ में अखिलेश यादव के सामने चुनावी नारे, टिकट चयन के सर्वे और डिजिटल कैंपेन को लेकर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अखिलेश को आई-पैक के अनुभव का लाभ लेने की सलाह दी थी। भाजपा को 2027 में कड़ी चुनौती देने के लिए सपा अब हर मोर्चे पर रणनीति मजबूत करने में जुटी है।

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