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Monday, 28 September 2026

हरियाली तीज: बहू-बेटियों को क्यों देते हैं 'सिंधारा'? जानें

भारतीय संस्कृति में तीज-त्योहारों का संबंध केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार के सदस्यों के बीच स्नेह और आत्मीयता को गहरा करने का माध्यम भी है। सावन के पवित्र महीने में पड़ने वाले हरियाली तीज के त्यौहार का सुहागिनों के जीवन में विशेष स्थान है। इस दिन मायके की ओर से शादीशुदा बेटियों और बहुओं के लिए सिंधारा भेजने का एक सुंदर रिवाज है। मुख्य रूप से राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निभाई जाने वाली यह परंपरा पारिवारिक रिश्तों की मिठास को दर्शाती है। आइए जानते हैं कि सिंधारा क्या है और तीज के पावन अवसर पर इसका क्या महत्व माना गया है। 

जानते हैं आगे...


हरियाली तीज पर क्यों दिया जाता है सिंधारा?

हिंदू धर्म में प्रचलित इस प्राचीन परंपरा के अनुसार, मायके से आया सिंधारा केवल एक उपहार नहीं बल्कि सुहाग की सुरक्षा का प्रतीक माना गया है। शादी के बाद भले ही बेटी अपने ससुराल में बस जाती है, लेकिन तीज के समय सिंधारा के रूप में मायके की यादें और प्यार उस तक जरूर पहुंचता है। सिंधारे में आई मिठाइयों को ससुराल के आसपास और नाते-रिश्तेदारों में बांटा जाता है, जिससे आपसी संबंध और भी मजबूत बनते हैं।


क्या होता है सिंधारा और इसमें क्या-क्या शामिल रहता है?

बहु-बेटियों को जो सिंधारा दिया जाता है उसमें क्या-क्या शामिल होता है, जानते हैं-


मायके से भेजा जाने वाला प्यार और आशीर्वाद

आसान शब्दों में कहें तो 'सिंधारा' एक विशेष सौगात या हैंपर होता है, जिसे लड़की के माता-पिता तीज पर्व से ठीक पहले अपनी विवाहित बेटी के घर भेजते हैं। इसमें बेटी और ससुराल पक्ष के लिए तरह-तरह के उपहार रखे जाते हैं, जो मायके वालों की ओर से दिए गए प्यार, सम्मान और आशीर्वाद का प्रतीक होते हैं।


सिंधारा के मुख्य उपहार

सिंधारे विशेष रूप से कुछ चीजें जरूर होती हैं, जो इस प्रकार हैं-


पारंपरिक मिठाइयां: सावन के मौसम का खास घेवर, गुझिया और अन्य पारंपरिक मिठाइयां।

श्रृंगार और सौभाग्य सामग्री: हरी चूड़ियां (जो सौभाग्य और समृद्धि दर्शाती हैं), मेहंदी, बिंदी, सिंदूर व आभूषण।

नए वस्त्र: बेटी और परिवार के सदस्यों के लिए हरे रंग की साड़ियां, सूट या पोशाकें।

फल एवं मेवे: मौसमी ताजे फल और सूखे मेवे।



धार्मिक मान्यता और शिव-पार्वती की कृपा

सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज मनाई जाती है। यह पावन दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिंधारे में भेजी जाने वाली श्रृंगार सामग्री को माता पार्वती के आशीर्वाद के रूप में देखा जाता है। नवविवाहिताओं और सुहागिनों के लिए यह सामग्री अखंड सौभाग्य और सुखी गृहस्थ जीवन का आधार बनती है।


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