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Wednesday, 28 October 2026

"आज़ाद और आज़ादी" समकालीन चुनौतियों पर तीखा प्रश्न

नई दिल्ली (रितेश सिन्हा) महान क्रांतिकारी अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती के अवसर पर आर्ट्स न्यू वे ऑर्गेनाइजेशन (एएनडब्ल्यूओ) एवं विराट एक्टिंग लैब के संयुक्त सहयोग से मंडी हाउस स्थित एलटीजी ऑडिटोरियम के ब्लैंक कैनवास सभागार में "आज़ाद और आज़ादी" शीर्षक से कविता और कथन पर आधारित एक प्रभावशाली रंगमंचीय प्रस्तुति का आयोजन किया गया। इस प्रस्तुति ने स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा को स्मरण करने के साथ-साथ वर्तमान समय की सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक विद्रूपताओं पर भी करारा प्रहार किया तथा दर्शकों को आत्ममंथन के लिए विवश कर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अमित कुमार पांडेय थे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में मणिका मल्होत्रा (देहरादून), मणिपुर कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री संजीता लिशाम, कवयित्री इन्दु "राज" निगम (संयोजिका, परम्परा संस्था) तथा कवि-शायर राजेन्द्र निगम "राज" (संस्थापक, परम्परा संस्था) उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने कलाकारों के सृजनात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि कला और रंगमंच समाज का दर्पण होता है तथा ऐसी प्रस्तुतियाँ लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय विचार को सशक्त बनाने का कार्य करती हैं।

प्रस्तुति की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें चंद्रशेखर आज़ाद के जीवन, विचारों और बलिदान को केवल ऐतिहासिक प्रसंगों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उनकी क्रांतिकारी चेतना के माध्यम से वर्तमान समय के ज्वलंत विषयों, सामाजिक असमानता, अन्याय, नैतिक पतन, युवाओं के सामने खड़ी चुनौतियों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के क्षरण, पर गंभीर प्रश्न खड़े किए गए। प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि आज़ादी केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि हर प्रकार के अन्याय, भय और शोषण के विरुद्ध निरंतर संघर्ष का नाम है।

आर्ट्स न्यू वे ऑर्गेनाइजेशन (एएनडब्ल्यूओ) एवं विराट एक्टिंग लैब ने इस मंचन के माध्यम से एक बार फिर सिद्ध किया कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण, वैचारिक संवाद और परिवर्तन की चेतना का सशक्त मंच भी है। दोनों संस्थाएँ निरंतर ऐसे विषयों पर कार्य कर रही हैं जो समाज को उसकी ऐतिहासिक विरासत से जोड़ते हुए वर्तमान चुनौतियों पर गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित करते हैं।

कार्यक्रम के आयोजक व वरिष्ठ समाजसेवी रिज़वान रज़ा ने कहा कि "आज़ाद और आज़ादी" का उद्देश्य केवल अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद को श्रद्धांजलि अर्पित करना नहीं, बल्कि उनके विचारों और संघर्ष की प्रासंगिकता को आज की युवा पीढ़ी तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज अन्याय, असमानता और भय के विरुद्ध निर्भीक होकर खड़ा नहीं होगा, तब तक आज़ाद के सपनों का भारत अधूरा रहेगा।

प्रस्तुति में अरविंद कुमार, सी.आर. सुरेश, कुलदीप वशिष्ठ, आरव वत्स, प्रेम प्रजापति, राजीव शर्मा तथा सायरा अली सहित सभी कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कविता, कथन और अभिनय के प्रभावी समन्वय ने पूरे सभागार को स्वतंत्रता संग्राम की चेतना से जोड़ते हुए वर्तमान समय के अनेक ज्वलंत प्रश्नों पर गंभीर आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया। विशेष रूप से कुलदीप वशिष्ठ के अभिनय ने चंद्रशेखर आज़ाद के व्यक्तित्व की दृढ़ता, साहस और वैचारिक प्रतिबद्धता को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से मंच पर जीवंत कर दिया। वहीं अरविंद कुमार, सी.आर. सुरेश, आरव वत्स, प्रेम प्रजापति, राजीव शर्मा और सायरा अली ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से नाटक को भावनात्मक गहराई और कलात्मक ऊँचाई प्रदान की।

कार्यक्रम के लेखक, रूपकार एवं निर्देशक आर. एस. विकल ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से यह स्थापित किया कि चंद्रशेखर आज़ाद का संघर्ष किसी एक कालखंड का इतिहास नहीं, बल्कि हर उस दौर की प्रेरणा है जहाँ अन्याय और असमानता के विरुद्ध आवाज़ उठाने की आवश्यकता हो। उन्होंने अपने सृजन के माध्यम से यह संदेश दिया कि स्वतंत्रता संग्राम के आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और वर्तमान समय की विद्रूपताओं का सामना करने के लिए समाज को उसी साहस और वैचारिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों और आयोजकों का लंबे समय तक तालियों की गड़गड़ाहट से अभिनंदन किया। दर्शकों ने इसे एक ऐसी प्रभावशाली सांस्कृतिक प्रस्तुति बताया जिसने इतिहास और वर्तमान के बीच एक सशक्त संवाद स्थापित करते हुए यह संदेश दिया कि चंद्रशेखर आज़ाद की विरासत केवल स्मरण करने की नहीं, बल्कि उनके विचारों को वर्तमान जीवन और समाज में उतारने की भी है।

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