सपनों को उड़ान देने के लिए पंख जरूरी और ये पंख हमारे अपने होते: दिव्या दत्ता
कानपुर मेट्रो परियोजना अंतिम चरण में: अप्रैल तक पूरा होगा 13.5 किमी भूमिगत टनल नेटवर्क
कानपुर | 25 मार्च 2026
कानपुर मेट्रो परियोजना अपने अहम पड़ाव पर पहुंच चुकी है, जहां भूमिगत टनल निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) के अनुसार, कॉरिडोर-2 में ‘पार्वती’ टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) अपलाइन टनल का काम अप्रैल तक पूरा कर लेगी। इसके साथ ही शहर में कुल 13.5 किलोमीटर लंबा भूमिगत मेट्रो नेटवर्क तैयार हो जाएगा, जो कानपुर जैसे घनी आबादी वाले शहर के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
कानपुर मेट्रो का कुल नेटवर्क लगभग 32.5 किलोमीटर का है, जिसमें से 13.5 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत है। कॉरिडोर-1 (आईआईटी-नौबस्ता) के 8.60 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन में 7 स्टेशन बनाए गए हैं, जिनमें से 5 पर सेवाएं शुरू हो चुकी हैं, जबकि 2 स्टेशनों का निर्माण जारी है। वहीं कॉरिडोर-2 (रावतपुर-डबल पुलिया) के 4.80 किलोमीटर लंबे हिस्से में रावतपुर, काकादेव और डबल पुलिया जैसे तीन अंडरग्राउंड स्टेशन तैयार किए जा रहे हैं।
परियोजना में कुल 7 टनल बोरिंग मशीनों का उपयोग किया गया है, जिनमें ‘नाना’, ‘तात्या’, ‘आजाद’, ‘विद्यार्थी’, ‘गोमती’, ‘सरस्वती’ और ‘पार्वती’ शामिल हैं। कॉरिडोर-2 में ‘गोमती’ टीबीएम ने 9 फरवरी 2026 को डाउनलाइन टनल का कार्य पूरा कर लिया है, जबकि ‘पार्वती’ मशीन अपलाइन टनल के अंतिम चरण में काम कर रही है। इसके पूरा होते ही कानपुर मेट्रो का पूरा भूमिगत टनल निर्माण कार्य समाप्त हो जाएगा।
टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) आधुनिक और सुरक्षित तकनीक पर आधारित होती है, जो बिना यातायात प्रभावित किए जमीन के अंदर सुरंग बनाती है। यह मशीन ‘अर्थ प्रेशर बैलेंस’ तकनीक से काम करती है, जिसमें खुदाई, मिट्टी निकालना और टनल की दीवार बनाना एक साथ होता है। कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से नियंत्रित यह प्रक्रिया 24 घंटे निगरानी में चलती है, जिससे टनल निर्माण सटीक और सुरक्षित तरीके से पूरा किया जाता है।
कानपुर मेट्रो परियोजना अंतिम चरण में: अप्रैल तक पूरा होगा 13.5 किमी भूमिगत टनल नेटवर्क
कानपुर मेट्रो परियोजना अपने अहम पड़ाव पर पहुंच चुकी है, जहां भूमिगत टनल निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) के अनुसार, कॉरिडोर-2 में ‘पार्वती’ टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) अपलाइन टनल का काम अप्रैल तक पूरा कर लेगी। इसके साथ ही शहर में कुल 13.5 किलोमीटर लंबा भूमिगत मेट्रो नेटवर्क तैयार हो जाएगा, जो कानपुर जैसे घनी आबादी वाले शहर के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
कानपुर मेट्रो का कुल नेटवर्क लगभग 32.5 किलोमीटर का है, जिसमें से 13.5 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत है। कॉरिडोर-1 (आईआईटी-नौबस्ता) के 8.60 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन में 7 स्टेशन बनाए गए हैं, जिनमें से 5 पर सेवाएं शुरू हो चुकी हैं, जबकि 2 स्टेशनों का निर्माण जारी है। वहीं कॉरिडोर-2 (रावतपुर-डबल पुलिया) के 4.80 किलोमीटर लंबे हिस्से में रावतपुर, काकादेव और डबल पुलिया जैसे तीन अंडरग्राउंड स्टेशन तैयार किए जा रहे हैं।
परियोजना में कुल 7 टनल बोरिंग मशीनों का उपयोग किया गया है, जिनमें ‘नाना’, ‘तात्या’, ‘आजाद’, ‘विद्यार्थी’, ‘गोमती’, ‘सरस्वती’ और ‘पार्वती’ शामिल हैं। कॉरिडोर-2 में ‘गोमती’ टीबीएम ने 9 फरवरी 2026 को डाउनलाइन टनल का कार्य पूरा कर लिया है, जबकि ‘पार्वती’ मशीन अपलाइन टनल के अंतिम चरण में काम कर रही है। इसके पूरा होते ही कानपुर मेट्रो का पूरा भूमिगत टनल निर्माण कार्य समाप्त हो जाएगा।
टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) आधुनिक और सुरक्षित तकनीक पर आधारित होती है, जो बिना यातायात प्रभावित किए जमीन के अंदर सुरंग बनाती है। यह मशीन ‘अर्थ प्रेशर बैलेंस’ तकनीक से काम करती है, जिसमें खुदाई, मिट्टी निकालना और टनल की दीवार बनाना एक साथ होता है। कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से नियंत्रित यह प्रक्रिया 24 घंटे निगरानी में चलती है, जिससे टनल निर्माण सटीक और सुरक्षित तरीके से पूरा किया जाता है।
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