बजट 2026 से बड़ी उम्मीदें: टैरिफ संकट के बीच अर्थव्यवस्था, निर्यात और रोजगार को नई रफ्तार देने की तैयारी

दिल्ली | 22 जनवरी 2026 वैश्विक टैरिफ संकट और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच एक फरवरी 2026 को पेश होने वाला आम बजट देश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकता है। जानकारों का मानना है कि यह बजट न केवल मौजूदा चुनौतियों से निपटने का रोडमैप देगा, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में सरकार की सोच को भी मजबूती से सामने रखेगा। बजट से निर्यात बढ़ाने, रोजगार सृजन और निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अर्थशास्त्री संदीप वेम्पति के अनुसार, सरकार इस बजट में व्यापार सुगमता, निर्यात, रोजगार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, पर्यावरण और शहरी-ग्रामीण विकास जैसे अहम क्षेत्रों पर खास फोकस कर सकती है। उनका कहना है कि 2014 से अपनाई गई सतत विकास रणनीति ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है और यह आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर आधारित है। उन्होंने बताया कि इस रणनीति के पांच मूलभूत स्तंभ हैं—नागरिकों और संप्रभुता की सुरक्षा, स्वास्थ्य-शिक्षा व सामाजिक सुरक्षा के साथ कौशल विकास, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन पर निरंतर ध्यान, मजबूत और लचीली अर्थव्यवस्था का निर्माण, तथा नेतृत्व की स्थिरता और प्रभावी गवर्नेंस। वेम्पति ने यह भी कहा कि बजट में समावेशी और संतुलित क्षेत्रीय विकास के जरिए आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ाने, निरंतर सुधारों, घरेलू विनिर्माण को सशक्त करने और अनुसंधान एवं विकास, नवाचार व उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है। बजट 2026 का कुल आकार 55 से 56 लाख करोड़ रुपये के बीच रहने की संभावना है। अनुमान है कि 2025-26 में नॉमिनल जीडीपी 10 फीसदी बढ़ेगी और 2026-27 में यह करीब 390 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। खर्च की गुणवत्ता सुधारने के तहत पूंजीगत व्यय 12.25 से 12.5 लाख करोड़ रुपये के बीच रह सकता है। राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता जारी रहने की उम्मीद है, जिसके लिए करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए जा सकते हैं। हालांकि, उच्च विकास दर हासिल करने में नियामक और वैधानिक स्वीकृतियां बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। व्यापार करने में आसानी सरकार की प्राथमिकता रहेगी और नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम के पुनर्गठन की घोषणा संभव है। इसके साथ ही राष्ट्रीय औद्योगिक नीति, राष्ट्रीय डाटा सेंटर नीति और निर्यात में मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने वाले कदमों की भी बजट में झलक देखने को मिल सकती है। बजट 2026 से उम्मीदें: टैरिफ संकट के बीच अर्थव्यवस्था, निर्यात और रोजगार पर रहेगा फोकस वैश्विक टैरिफ संकट और आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला आम बजट देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। माना जा रहा है कि यह बजट 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदमों को मजबूती देगा और आर्थिक रफ्तार को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा। अर्थशास्त्री संदीप वेम्पति के अनुसार, सरकार बजट में व्यापार सुगमता, निर्यात, रोजगार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, पर्यावरण और शहरी-ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान दे सकती है। उन्होंने कहा कि 2014 से लागू सतत विकास रणनीति ने अर्थव्यवस्था को गति दी है और यह आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर आधारित है। वेम्पति के शब्दों में, इसके “पांच मूलभूत स्तंभ हैं… नागरिकों एवं संप्रभुता की सुरक्षा, स्वास्थ्य-शिक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा और कौशल विकास, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर निरंतर ध्यान, मजबूत और लचीली वृहद अर्थव्यवस्था का निर्माण तथा नेतृत्व की स्थिरता और प्रभावी गवर्नेंस।” उन्होंने बताया कि बजट में समावेशी और संतुलित क्षेत्रीय विकास, निरंतर सुधार, घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार और उत्पादकता बढ़ाने जैसे क्षेत्रों पर जोर रह सकता है। अनुमान है कि बजट 2026 का आकार 55 से 56 लाख करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। नॉमिनल जीडीपी में 10 फीसदी की वृद्धि के साथ आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था के और विस्तार की संभावना जताई जा रही है। खर्च की गुणवत्ता सुधारने के लिए पूंजीगत व्यय 12.25 से 12.5 लाख करोड़ रुपये तक रह सकता है और राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, नियामक और वैधानिक स्वीकृतियां अभी भी उच्च विकास दर में बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसे देखते हुए व्यापार करने में आसानी, नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम के पुनर्गठन, राष्ट्रीय औद्योगिक नीति और राष्ट्रीय डाटा सेंटर नीति जैसी घोषणाएं बजट में देखने को मिल सकती हैं। 

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