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काशी-तमिल संगमम 2025: संस्कृति, भाषा और युवा उत्साह का अनूठा संगम
वाराणसी | 15 जनवरी 2026
काशी में आयोजित चौथे काशी-तमिल संगमम ने इस बार भी संस्कृति, भाषा और युवाओं के उत्साह का अद्भुत प्रदर्शन किया। संगमम में तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के विद्यार्थी, कलाकार और विद्वान अपनी प्रतिभा और सांस्कृतिक समझ दिखाने के लिए उपस्थित हुए। भारतीय रेल ने तमिलनाडु से उत्तर प्रदेश आने वाले श्रद्धालुओं और प्रतिभागियों के लिए विशेष ट्रेनें चलाईं, जिससे काशी यात्रा और भी यादगार बनी।
संगमम और सोमनाथ के स्वाभिमान पर्व में भाग लेने का अनुभव देशभर के लोगों में अपनी जड़ों और इतिहास से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है। सोमनाथ के स्वाभिमान पर्व में, जो वर्ष 1026 के पहले आक्रमण के हजार साल पूरे होने पर मनाया गया, देशभर के लोग शामिल हुए। इस अवसर ने यह दर्शाया कि भारतवासी अपने इतिहास और संस्कृति से कितने गहराई से जुड़े हैं और उनमें कभी हार न मानने वाला साहस भी कितना प्रबल है।
काशी-तमिल संगमम ने न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान का अवसर दिया, बल्कि तमिल भाषा सीखने और समझने के लिए भी मंच प्रदान किया। महाकवि सुब्रमण्यम भारती और पूज्य कुमारगुरुपरर् स्वामी जी जैसे महान व्यक्तित्वों ने काशी और तमिलनाडु के बीच गहरे बौद्धिक और आध्यात्मिक संबंध स्थापित किए। चौथे संस्करण में ‘तमिल करकलम्’ की थीम के तहत विद्यार्थियों को तमिल भाषा सीखने का अवसर मिला, जिसमें तमिल शिक्षक और स्थानीय युवा बड़े उत्साह से शामिल हुए।
इस आयोजन में डिजिटल लिट्रेसी कैंप, स्वास्थ्य शिविर और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षा और समाज सेवा का भी संदेश दिया गया। तेनकासी से काशी तक पहुंची विशेष व्हीकल एक्सपेडिशन और पांड्य वंश के महान राजा वीर पराक्रम पांडियन को श्रद्धांजलि देने के प्रयासों ने इसे और भी समृद्ध और यादगार बनाया। काशी-तमिल संगमम ने इस बार यह साबित कर दिया कि विविधता में एकता और भाषा-संस्कृति का संगम भारत की शक्ति है।
काशी-तमिल संगमम 2025: संस्कृति और युवाओं के उत्साह का अद्भुत मिलन
काशी में आयोजित चौथे काशी-तमिल संगमम ने इस बार संस्कृति, भाषा और युवा उत्साह का शानदार प्रदर्शन किया। तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के विद्यार्थी, कलाकार और विद्वान संगमम में शामिल होकर अपनी प्रतिभा और सांस्कृतिक समझ का परिचय दे रहे थे। भारतीय रेल ने तमिलनाडु से उत्तर प्रदेश आने वाले प्रतिभागियों के लिए विशेष ट्रेनें चलाकर यात्रा को आसान और यादगार बनाया।
संगमम के साथ-साथ सोमनाथ के स्वाभिमान पर्व में भाग लेने का अनुभव भी देशभर के लोगों को अपनी जड़ों और इतिहास से जुड़ने की प्रेरणा देता है। इस पर्व को वर्ष 1026 में सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण के हजार साल पूरे होने के अवसर पर मनाया गया। देश के कोने-कोने से लोग शामिल हुए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारतीय जनता अपने इतिहास और संस्कृति के प्रति कितनी गहरी भावनाओं से जुड़ी हुई है।
काशी-तमिल संगमम ने तमिल भाषा सीखने और समझने का भी एक अनूठा अवसर प्रदान किया। चौथे संस्करण की थीम ‘तमिल करकलम्’ के तहत विद्यार्थियों ने तमिल सीखने का अनुभव प्राप्त किया। इस दौरान तमिल शिक्षक और स्थानीय युवा विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में भाषा और संस्कृति के महत्व को साझा करते हुए कार्यक्रम को और समृद्ध बनाया।
संगमम में डिजिटल लिट्रेसी कैंप, स्वास्थ्य शिविर और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षा और समाज सेवा का संदेश भी दिया गया। तेनकासी से काशी तक पहुंची विशेष व्हीकल एक्सपेडिशन और पांड्य वंश के महान राजा वीर पराक्रम पांडियन को श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रम ने आयोजन को और यादगार बना दिया। इस तरह काशी-तमिल संगमम ने यह साबित कर दिया कि संस्कृति और भाषा के माध्यम से युवाओं में एकता और सीख का अनुभव गहराई से पैदा होता है।
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