होली का रंग पड़ा भारी: कानपुर में हुड़दंग और लापरवाही से 119 से अधिक लोग अस्पताल पहुंचे

कानपुर। 5 मार्च 2026


कानपुर में होली का त्योहार इस बार कई लोगों के लिए भारी पड़ गया। रंगों और मस्ती के बीच हुई लापरवाही और हुड़दंग के कारण 119 से अधिक लोग घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए एलएलआर अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। कई लोगों की आंखों में "केमिकल युक्त रंग" चले जाने से गंभीर परेशानी हुई, जबकि बिना हेलमेट बाइक चलाने वालों को सिर में चोटें आईं। कुछ मामलों में लोगों की हड्डियां भी टूट गईं, जिसके कारण उन्हें अलग-अलग विभागों में भर्ती करना पड़ा।


डॉक्टरों के अनुसार, आंखों में "केमिकल युक्त रंग" जाने से करीब 13 मरीजों को कॉर्नियल इंजरी के साथ इमरजेंसी में भर्ती करना पड़ा। वहीं, बिना हेलमेट बाइक चलाने वाले 27 लोग सिर में चोट लगने के कारण न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती किए गए। इसके अलावा हड्डी टूटने के 13 मरीजों को आर्थो विभाग में भर्ती किया गया। इसी दौरान उर्सुला अस्पताल की इमरजेंसी में 22 और कांशीराम चिकित्सालय में 17 घायलों को भर्ती किया गया।


एलएलआर अस्पताल के सीएमएस डॉ. विकास कटियार ने बताया कि इमरजेंसी में पहले से की गई तैयारियों के कारण सभी मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज दिया गया। चार मार्च को मेडिसिन विभाग में 29, बाल रोग में सात, आर्थो विभाग में आठ, चेस्ट चिकित्सालय में छह, गायनी में पांच, न्यूरोलॉजी में पांच, न्यूरो सर्जरी में 22 और सर्जरी विभाग में पांच मरीज भर्ती हुए। सभी मरीजों को "रेड जोन" में प्राथमिक इलाज देने के बाद संबंधित विभागों के वार्ड में शिफ्ट किया गया।


अस्पताल प्रशासन के अनुसार पांच मार्च को भी कई मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इस दिन मेडिसिन विभाग में 13, बाल रोग में तीन, आर्थो विभाग में पांच, गायनी में पांच, न्यूरोलॉजी में एक और न्यूरो सर्जरी विभाग में पांच मरीज भर्ती हुए। एलएलआर अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक प्रो. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि इमरजेंसी में ट्रॉमा केयर के लिए पहले से विशेष व्यवस्था की गई थी। वहीं, उर्सुला और कांशीराम अस्पतालों में भी सड़क हादसों में घायल मरीजों की संख्या ज्यादा रही, जिनमें सिर और हाथ-पैर में चोट के मामले अधिक थे।

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कानपुर में होली का त्योहार इस बार कई लोगों के लिए भारी पड़ गया। रंगों और मस्ती के बीच हुई लापरवाही और हुड़दंग के कारण 119 से अधिक लोग घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए एलएलआर अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। कई लोगों की आंखों में "केमिकल युक्त रंग" चले जाने से गंभीर परेशानी हुई, जबकि बिना हेलमेट बाइक चलाने वालों को सिर में चोटें आईं। कुछ मामलों में लोगों की हड्डियां भी टूट गईं, जिसके कारण उन्हें अलग-अलग विभागों में भर्ती करना पड़ा।


डॉक्टरों के अनुसार, आंखों में "केमिकल युक्त रंग" जाने से करीब 13 मरीजों को कॉर्नियल इंजरी के साथ इमरजेंसी में भर्ती करना पड़ा। वहीं, बिना हेलमेट बाइक चलाने वाले 27 लोग सिर में चोट लगने के कारण न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती किए गए। इसके अलावा हड्डी टूटने के 13 मरीजों को आर्थो विभाग में भर्ती किया गया। इसी दौरान उर्सुला अस्पताल की इमरजेंसी में 22 और कांशीराम चिकित्सालय में 17 घायलों को भर्ती किया गया।


एलएलआर अस्पताल के सीएमएस डॉ. विकास कटियार ने बताया कि इमरजेंसी में पहले से की गई तैयारियों के कारण सभी मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज दिया गया। चार मार्च को मेडिसिन विभाग में 29, बाल रोग में सात, आर्थो विभाग में आठ, चेस्ट चिकित्सालय में छह, गायनी में पांच, न्यूरोलॉजी में पांच, न्यूरो सर्जरी में 22 और सर्जरी विभाग में पांच मरीज भर्ती हुए। सभी मरीजों को "रेड जोन" में प्राथमिक इलाज देने के बाद संबंधित विभागों के वार्ड में शिफ्ट किया गया।


अस्पताल प्रशासन के अनुसार पांच मार्च को भी कई मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इस दिन मेडिसिन विभाग में 13, बाल रोग में तीन, आर्थो विभाग में पांच, गायनी में पांच, न्यूरोलॉजी में एक और न्यूरो सर्जरी विभाग में पांच मरीज भर्ती हुए। एलएलआर अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक प्रो. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि इमरजेंसी में ट्रॉमा केयर के लिए पहले से विशेष व्यवस्था की गई थी। वहीं, उर्सुला और कांशीराम अस्पतालों में भी सड़क हादसों में घायल मरीजों की संख्या ज्यादा रही, जिनमें सिर और हाथ-पैर में चोट के मामले अधिक थे।


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