रिंकू सिंह का फर्ज और परिवार: पिता के निधन के बाद टीम इंडिया में शामिल होंगे स्टार बल्लेबाज

अलीगढ़ |  28 फरवरी 2026


भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता खानचंद का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। 60 वर्षीय खानचंद लंबे समय से चौथी स्टेज के लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। वे ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में सुबह 4:30 बजे अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर एंबुलेंस से सुबह 10 बजे अलीगढ़ के ओजोन सिटी स्थित गोल्डन एस्टेट पर पहुंचा। पिता के निधन की खबर मिलते ही रिंकू सिंह दोपहर में चेन्नई से सीधे अलीगढ़ पहुंचे और नम आंखों से पिता की अर्थी को कांधा दिया।


खानचंद ने रिंकू सिंह को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे गैस एजेंसी में सिलिंडर डिलीवरी का काम करते थे और आर्थिक तंगी के बावजूद कभी अपने बेटे के सपनों को बाधित नहीं होने दिया। उनके निधन के बाद रिंकू ने भारी मन के बावजूद देश के लिए खेलने का संकल्प लिया। अंतिम संस्कार शंकर विहार स्थित श्मशान घाट पर किया गया, जहाँ उनके बड़े बेटे सोनू सिंह ने मुखाग्नि दी। परिवार में पत्नी बीना, चार बेटे (सोनू, मुकुल, शीलू, रिंकू) और बेटी नेहा हैं, और रिंकू परिवार में सबसे छोटे हैं।


टी-20 वर्ल्ड कप के इस निर्णायक मोड़ पर रिंकू की टीम में मौजूदगी अहम मानी जा रही है। भारत और पाकिस्तान के हाई-वोल्टेज मुकाबले में रिंकू ने जब विजयी चौका लगाया था, तब बिस्तर पर लेटे पिता की आंखें खुशी से चमक उठीं। पिता की वह आखिरी खुशी अब रिंकू के लिए वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाले ‘करो या मरो’ मुकाबले में सबसे बड़ी प्रेरणा बनेगी। शनिवार दोपहर 12 बजे रिंकू अपने व्यक्तिगत दर्द को पीछे छोड़कर सीधे टीम इंडिया के बायो-बबल में शामिल होंगे।


रिंकू का यह फैसला क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ियों सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली जैसी कर्तव्यनिष्ठा की याद दिलाता है। इस दौरान बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला, सांसद सतीश गौतम, विधायक अनिल पाराशर और पूर्व सांसद राजवीर सिंह राजू सहित कई प्रतिष्ठित लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। रिंकू के परिवार और टीम के लिए यह समय भावनाओं से भरा और चुनौतीपूर्ण दोनों है।

रिंकू सिंह का फर्ज और परिवार: पिता के निधन के बाद टीम इंडिया में शामिल होंगे स्टार बल्लेबाज


भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता खानचंद का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। 60 वर्षीय खानचंद लंबे समय से चौथी स्टेज के लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। वे ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में सुबह 4:30 बजे अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर एंबुलेंस से सुबह 10 बजे अलीगढ़ के ओजोन सिटी स्थित गोल्डन एस्टेट पर पहुंचा। पिता के निधन की खबर मिलते ही रिंकू सिंह दोपहर में चेन्नई से सीधे अलीगढ़ पहुंचे और नम आंखों से पिता की अर्थी को कांधा दिया।


खानचंद ने रिंकू सिंह को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे गैस एजेंसी में सिलिंडर डिलीवरी का काम करते थे और आर्थिक तंगी के बावजूद कभी अपने बेटे के सपनों को बाधित नहीं होने दिया। उनके निधन के बाद रिंकू ने भारी मन के बावजूद देश के लिए खेलने का संकल्प लिया। अंतिम संस्कार शंकर विहार स्थित श्मशान घाट पर किया गया, जहाँ उनके बड़े बेटे सोनू सिंह ने मुखाग्नि दी। परिवार में पत्नी बीना, चार बेटे (सोनू, मुकुल, शीलू, रिंकू) और बेटी नेहा हैं, और रिंकू परिवार में सबसे छोटे हैं।


टी-20 वर्ल्ड कप के इस निर्णायक मोड़ पर रिंकू की टीम में मौजूदगी अहम मानी जा रही है। भारत और पाकिस्तान के हाई-वोल्टेज मुकाबले में रिंकू ने जब विजयी चौका लगाया था, तब बिस्तर पर लेटे पिता की आंखें खुशी से चमक उठीं। पिता की वह आखिरी खुशी अब रिंकू के लिए वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाले ‘करो या मरो’ मुकाबले में सबसे बड़ी प्रेरणा बनेगी। शनिवार दोपहर 12 बजे रिंकू अपने व्यक्तिगत दर्द को पीछे छोड़कर सीधे टीम इंडिया के बायो-बबल में शामिल होंगे।


रिंकू का यह फैसला क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ियों सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली जैसी कर्तव्यनिष्ठा की याद दिलाता है। इस दौरान बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला, सांसद सतीश गौतम, विधायक अनिल पाराशर और पूर्व सांसद राजवीर सिंह राजू सहित कई प्रतिष्ठित लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। रिंकू के परिवार और टीम के लिए यह समय भावनाओं से भरा और चुनौतीपूर्ण दोनों है।


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