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Solar Eclipse 2020: 21 जून का सूर्यग्रहण दूर करेगा जीवन की सारी बाधाएं, करें ये उपाय

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अगर आप काफी दिनों से कठिन दौर से गुजर रहे हैं। आर्थिक तंगी दूर होने का नाम नहीं ले रही है या फिर परिवार में कोई व्यक्ति बीमार चल रहा है, तो 21 जून 2020 को आ रहा खंडग्रास सूर्यग्रहण आपकी सारी परेशानियां दूर कर देगा।

राहु-केतु से जुड़े उपाय
ग्रहण का सीधा संबंध राहु-केतु से होता है। राहु केतु का इंसान के जीवन का गहरा प्रभाव होता है। शास्त्रो में कहा गया है कि राहु-केतु का स्थान मनुष्य के शरीर के निचले हिस्से खासकर पैरों में होता है।

इसलिए यदि आप ग्रहणकाल में किसी गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति को असली चमड़े के काले या भूरे रंग के जूते-चप्पल दान करेंगे तो आपके संकट दूर होंगे और इससे पितृ भी प्रसन्न होते हैं।

धन की कमी दूर करने के लिए करें ये उपाय
सूर्यग्रहण के समय एक रुपए का सिक्का पूजा स्थान में रखने से आपकी आर्थिक तंगी दूर होगी।

इस दिन भगवान सूर्यदेव के 12 नामों का स्मरण करें।

ग्रहण समाप्त होने के बाद सिक्के को गंगाजल से धोकर एक लाल कपड़े में बांधकर घर की तिजोरी में रख दे।

ग्रहण काल में 7 गोमती चक्र लेकर इन्हें पूजा स्थान में रखें।

ग्रहण समाप्ति के बाद इन्हें गंगाजल से धोकर पूजन करें।

श्रीसूक्त का पाठ करके तिजोरी में रखें।

बिजनेस में लाभ कमाने के लिए ग्रहण शुरू होने से पहले 1 दक्षिणावर्ती शंख, 7 गोमती चक्र और 7 लघु नारियल पूजा स्थान में रखें।

ग्रहण के बाद इन्हें गंगाजल से पवित्र कर इनका पूजन करें।

सभी सामग्री को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें।

ग्रहण काल में कुबेर यंत्र या श्री यंत्र स्थापित करने से कभी धन की कमी नहीं होती।

बिजनेस में तरक्की के लिए ग्रहण से पहले एक तांबे का सूर्य यंत्र घर ले आएं।

इसे गंगाजल से शुद्ध करके, पूजन करें और आदित्य हृदय स्तोत्र के 12 पाठ करें।

इस यंत्र को घर में स्थापित करने से लाभ होने लगता है।

रोगों से मुक्ति के लिए
संकल्प करके पूरे ग्रहण काल में महामृत्युंजय मंत्र का जाप रूद्राक्ष की माला से करते रहें।

रोग से मुक्ति पाने के लिए ग्रहण् काल में कांसे की कटोरी में पिछला देसी घी भरें।

इसमें एक रुपए का सिक्का या चांदी का छोटा सा टुकड़ा डालें।

इसमें रोगी अपनी परछाई देखे और फिर मंदिर में या किसी गरीब को दान कर दें।

ग्रहण के दौरान काले या भूरे रंग का कंबल दान करने से रोग मुक्ति शीघ्र होती है।

रोगी के वजन के बराबर आटे या खड़े अनाज को तौलकर दान करें।

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