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Hindi Diwas 2020 : आज है हिंदी दिवस,14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान में यह तय किया गया कि हिंदी हमारी राजभाषा होगी

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भारत समेत पूरी दुनियाभर में 14 सितंबर को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं है? जी हां, सही पढ़ा आपने. हिंदी सिर्फ हमारी राजभाषा है. हमारी राष्ट्रभाषा कुछ है ही नहीं. आज से 71 साल पहले यानि 14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान में यह तय किया गया कि हिंदी हमारी राजभाषा होगी.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 से लेकर 351 तक राजभाषा हिंदी के इस्तेमाल को बखूबी समझाया गया है, लेकिन संविधान ने हिंदी को सिर्फ राजभाषा ही माना है राष्ट्रभाषा कभी नहीं माना. इसके लिए हमारा लिपि देवनागरी मानी गई है. संविधान सभा ने 14 सितंबर को इसका फैसला किया था.

इतिहास

जब देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ तो भारत का संविधान बनाने के लिए संविधान सभा का गठन हो चुका था. तब देश में कई भाषाएं थी. देश आजाद होने के बाद संविधान सभा के सामने यह समस्या खड़ी हुई कि किसे राजभाषा बनाया जाए, यह तय करना एक भी चुनौती थी. इसके बाद संविधान सभा में लंबी बहस हुई.

लंबी बहस के बाद यह माना गया कि हिंदी ही देश में सबसे अधिक बोली, समझी और लिखी जाती है. इसके बाद 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा दे दिया गया. फिर साल 1953 से 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत हुई.
अब आगे बताते है हिंदी दिवस हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है। देश की राष्‍ट्र भाषा हिंदी के प्रति इस दिन सम्‍मान भाव प्रकट करने के ध्‍येय से कई आयोजन किए जाते हैं। सरकारी व निजी कार्यालयों में इस दिन सारे संवाद हिंदी में किए जाने की कोशिशों के बीच, अभिव्‍यक्ति के तमाम मंचों पर गद्य एवं पद्य में हिंदी की बातें की जाती हैं। लेकिन आपके मन में सवाल उठता होगा कि हिंदी तो एक भाषा है। इसका कोई एक दिन कैसे हो सकता है। क्‍या इस दिन के पहले हिंदी का अस्तित्‍व नहीं था। ऐसे ही सारे सवालों एवं जिज्ञासाओं का हम यहां समाधान करने जा रहे हैं।

आप सबको तो पता ही है की हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर वर्ष 1953 से पूरे भारत में 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है। एक तथ्य यह भी है कि 14 सितम्बर 1949 को हिन्दी के पुरोधा व्यौहार राजेन्द्र सिंहा का 50-वां जन्मदिन था, जिन्होंने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए बहुत लंबा संघर्ष किया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त, हजारीप्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविन्ददास आदि साहित्यकारों को साथ लेकर व्यौहार राजेन्द्र सिंह ने अथक प्रयास किए।

वर्ष 1918 में गांधी जी ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था। इसे गांधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था। वर्ष 1949 में स्वतंत्र भारत की राष्ट्रभाषा के प्रश्न पर 14 सितम्बर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जो भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की अनुच्छेद 343(1) में वर्णित है। इसके अनुसार संघ की राष्ट्रभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी।

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