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HAPPY BIRTHDAY KING KHAN:शाहरुख खान ने अपने शुरुआती दौर में ही अपनी काबिलियत पहचान ली थी

शाहरुख का जन्म 1965 में ताज मोहम्मद खान और लतीफ फातिमा के परिवार में हुआ था. उनके पिता एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे.
शाहरुख ने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली से सेंट कोलम्बा स्कूल से की. उन्होंने दिल्ली के हंसराज कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरी की. उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन भी करने की कोशिश की, लेकिन किन्हीं कारणों से उन्हें इसे बीच में ही छोड़ना पड़ा.
शाहरुख बैरी जॉन के थिएटर ग्रुप का हिस्सा भी रहे है. उन्होंने 1988 में आए टीवी सीरियल ‘फौजी’ में कमांडो अभिमन्यू राय का किरदार भी निभाया था. उनका टीवी शो सर्कस लोगों को काफी पसंद आया.

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शाहरुख ने गौरी छिब्बर से 25 अक्टूबर 1991 को शादी की. गौरी के परिजन इस शादी के खिलाफ थे, लेकिन उन्होंने शाहरुख से शादी करने का फैसला किया.
करण जौहर ने अपनी आत्मकथा ‘एन अनसूटेबल बॉय’ में तफ्सील से बताया है कि शाहरुख खान उनके लिए क्या थे, हैं और क्या बने रहेंगे. फिल्मी दुनिया का होने की वजह से स्टार किड्स से घिरे रहने के बावजूद दिल्ली से आकर बॉलीवुड के क्षितिज पर चमकने वाले इस ‘बाहरी’ सितारे से कैसे उनकी दोस्ती हुई, कैसे शाहरुख उनके बड़े भाई जैसे हुए और कैसे अकेले शाहरुख की वजह से वे फिल्म निर्देशक बने, यह सब और बहुत कुछ करण जौहर ने अपनी आत्मकथा में आत्मीयता से दर्ज किया है.

लेकिन उनका दर्ज किया एक अनूठा किस्सा जाने-अनजाने इस अफवाह को सच साबित कर देता है कि संघर्ष के दिनों में भी शाहरुख खान थे एक खालिस सुपरस्टार ही! और अगर वे वैसे न होते, तो आज जैसे हैं वैसे न हो पाते.

बात उन दिनों की है जब रईस बच्चों की परवरिश पाने वाले करण जौहर दसवीं कक्षा का एक्जाम दे चुके थे और काम की तलाश में शाहरुख खान दिल्ली से मुंबई शिफ्ट हो चुके थे. इसी दौरान एक्जाम के बाद वाली छुट्टियों में करण जौहर की मां के पास लेखक-निर्देशक आनंद महेंद्रू का फोन आया (जिन्होंने बाद के वर्षों में ‘देख भाई देख’ सीरियल बनाया था) और चूंकि मुंबई में हर फिल्मी फैमिली दूसरी फैमिली से फैमिलियर होती है इसलिए उन्होंने हीरू जौहर से पूछा, ‘मेरे ख्याल से आपका बेटा बहुत मोटा है?’

हीरू जौहर ने छूटते ही कहा कि छुटपन का मोटापा है, छट जाएगा. आनंद महेंद्रू ने मुद्दे की बात पर आते हुए कहा कि एक रोल के लिए उन्हें मोटे लड़के की जरूरत है, क्या वे अपने बेटे को उनके ऑफिस भेज सकती हैं. आनंद महेंद्रू उस समय ‘इंद्रधनुष’ (1989) नामक सीरियल बना रहे थे और इसी धारावाहिक के चलते एक-दूसरे से अंजान शाहरुख खान और करण जौहर पहली बार एक-दूसरे से मिले थे. यह एक ऐसी मुलाकात है जो शाहरुख को भी बरसों बाद याद रही, और करण ने भी न भूलते हुए उसे अपनी आत्मकथा में दर्ज किया. लेकिन जब यह मुलाकात हुई थी, तब दोनों में से किसी ने भी दूसरे से बात नहीं की थी!

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