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धनतेरस पर भूल से भी ना खरीदें ये चीज

धनतेरस का त्योहार, जिसे दिवाली से दो दिन पहले मनाया जाता है. इस दिन को खरीददारी के लिए पूरे साल के दिनों सबसे अधिक शुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन खरीददारी करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है और घर की सुख-समृद्धि की आना शुरु हो जाती है. लेकिन धनतेरस पर खरीददारी के ...

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शरद पूर्णिमा का क्या है महत्व, जानें

महारास की रात्रि शरद पूर्णिमा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को पड़ती है। शास्त्रों में इस पूर्णिमा को बेहद खास महत्व प्रदान किया गया है। इसी दिन से सर्दियों का आरम्भ माना जाता है। कहते हैं कि शरद पूर्णिमा का व्रत रखने से हर प्रकार की मनोकामना की पूर्ति हो जाती है। महारास की रात्रि शरद पूर्णिमा की ...

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कामाख्या देवी शक्तिपीठ में कराएं शत्रुदमन के लिए मां बगलामुखी विशिष्ट पूजा

राजयोग की देवी माता बगलामुखी का मंदिर कामाख्या देवी शक्तिपीठ के निकट असम राज्य में स्थित है । मां भगवती बगलामुखी का महत्व समस्त देवियों में सबसे विशिष्ट है । नवरात्रि में मां बगलामुखी का अधिक से अधिक जप करना विशेष फलदायी होता है । पूजा ऑर्डर करके भी किया जाता है , एक दिन पहले फोन पर सारी जानकारी ...

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ये संकेत मिलने लगें तो समझो मां लक्ष्मी हैं आप पर मेहरबान

शारदीय नवरात्र अधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्रि में मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की पूजा की जाती है। पुराणों के अनुसार इन नवरात्रि के दौरान अगर आपको कुछ खास संकेत मिलने लगें तो समझ लों कि मां लक्ष्मी के साथ समस्त ब्रहामाण्ड की शक्तियां आप पर मेहरबान हैं। भारतीय संस्कृति में सोलह श्रृंगार को शुभता का संकेत माना ...

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ब्रह्मचारिणी स्वरूप के नाम नवरात्र का दूसरा दिन, व्रत में ऐसे करें पूजा

नवरात्रि के दूसरे दिन मां के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की उपासना की जाती है. इनको ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है. कठोर साधना और ब्रह्म में लीन रहने के कारण इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है. विद्यार्थियों के लिए और तपस्वियों के लिए इनकी पूजा बहुत ही शुभ फलदायी होती है. जिनका स्वाधिष्ठान चक्र कमजोर हो उनके लिए भी ...

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लखनऊ में एक ऐसा मन्दिर जहां शनि शिला की होती है पूजा

सूर्यपुत्र भगवान श्री शनिदेव सुख-शांति, यश-वैभव, धन-सम्पत्ति एवं पद-प्रतिष्ठा के प्रदाता है। श्री शनिदेव महाराज पृथ्वीवासियों को उनके कर्म के अनुसार दण्डित व पुरस्कृत करते हैं। शास्त्रों के अनुसार शनि पर्वत पर ही भगवान श्री शनिदेव ने घोर तपस्या कर मानव कल्याण के लिये शक्ति एवं बल प्राप्त किया। आज के इस युग में भगवान शनिदेव की पूजा का विशेष महत्व है।                 भगवान श्री शनिदेव के अनेक मंदिर हैं। श्री शनिदेव के मंदिरों में शिंगनापुर (महाराष्ट्र) का विशेष महत्व है। शिंगनापुर (महाराष्ट्र) के शनि मंदिर में श्री शनि पर्वत की शिलापट्ट स्थापित है, उसी प्रकार शिलापट्ट लखनऊ के ‘श्री शनिदेव अहिमामऊ धाम’ में स्थापित हुई है। शनि पर्वत से लाई गई शिला का अपना एक अलग महात्म्य है। लखनऊ स्थित ‘श्री शनिदेव अहिमामऊ धाम’ की शिला अलौकिक एवं अद्भुत होने के साथ-साथ अपने आप में चमत्कारिक भी है, जिसकी आराधना करने से भगवान श्री शनि की कृपा मिलती है। इस धाम में भगवान सूर्य की पत्नी यानी शनि भगवान की माता छाया की प्रतिमा भी स्थापित है, जो सम्भवतः लखनऊ के किसी भी मन्दिर में नहीं है। ‘श्री शनिदेव अहिमामऊ धाम’ के पवित्र स्थान पर शनि अमावस्या के दिन विशाल भण्डारे का आयोजन होता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण ‘श्री शनिदेव अहिमामऊ धाम’ के दर्शन कर भण्डारे में प्रसाद ग्रहण करते हैं। यहां आकर अपार आत्मिक शांति का अनुभव होता है। इस बार शनि अमावस्या के दिन ही पितृ विसर्जन भी है। इस दृष्टि से इसका और भी विशेष महत्व है।                 भगवान शनिदेव के उपासक एवं सिद्धहस्त राजस्थान निवासी ब्रह्मलीन स्वामी श्री विरक्तानन्द जी महाराज मध्य प्रदेश के जनपद मुरैना स्थित शनि पर्वत से 1992 में श्री शनिदेव शिला लाये थे और 11 वर्षों तक ध्यान मग्न रह कर साधना (घोर तपस्या) कर शिला की आराधना करते रहें। इसी मध्य स्वामी विरक्तानन्द जी महाराज की लखनऊ निवासी श्री बद्री नारायण से भेंट हुई। बद्री नारायण प्रत्येक शनिवार को लखनऊ से लगभग 400 कि0मी0 दूर मुरैना (शनि पर्वत) भगवान शनिदेव के दर्शन के लिये जाते थे। स्वामी जी उनकी शनि महाराज के प्रति आस्था एवं भक्तिभाव को देखकर बहुत प्रभावित हुए। स्वामी विरक्तानन्द जी महाराज ने बद्री नारायण से लखनऊ में किसी स्थान पर सिद्ध ‘श्री शनि शिला’ की स्थापना करने की इच्छा व्यक्त की तो वे स्वामी जी की इच्छा को टाल नहीं सके और लखनऊ के अहिमामऊ क्षेत्र स्थित अपनी भूमि पर ‘श्री शनि शिला’  स्थापित करने हेतु सहर्ष तैयार हो गये। इस प्रकार लखनऊ के अहिमामऊ क्षेत्र में सन् 2003 में इस अद्भुत एवं सिद्ध शिला की स्थापना हुई, जो आज ‘श्री शनिदेव अहिमामऊ धाम’  के नाम से प्रसिद्ध है। भगवान शनिदेव में आस्था रखने वाले श्री बद्री नारायण द्वारा संरक्षक के रूप में आज भी ब्रह्मलीन स्वामी जी की आज्ञा का पालन करते हुए ‘श्री शनि शिला’  की नियमित एवं विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान श्री शनिदेव का आर्शीवाद प्राप्त किया जा रहा है।                 ‘श्री शनिदेव अहिमामऊ धाम’  की कृपा से अहिमामऊ क्षेत्र का तीव्रगति से विकास हो रहा है। प्रत्येक शनिवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण पहुंचते हैं। ‘श्री शनिदेव अहिमामऊ धाम’ का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिये एक बार अवश्य दर्शन करें।

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इस समय पैदा होने वाले होते हैं सबसे ज्यादा बुद्धिमान

ज्यादा समझदार रात में पैदा होने वाले लोगों को बहुत समझदार माना जाता है. इनमें बहुत धैर्य होता है और ये अक्सर शांत रहते हैं. बेस्ट प्रॉब्लम सॉल्वर इस समय पैदा हुए लोगों को बेस्ट प्रॉब्लम सॉल्वर माना जाता है. रात में पैदा हुए लोग रात में जल्दी नहीं सोते हैं और रात में उनका दिमाग ज्यादा चलता है. शारीरिक ...

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Vishwakarma Puja: क्या है विश्वकर्मा पूजा का महत्व?

हर साल विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रांति को मनाई जाती है. इस दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था, इसलिए इसे विश्वकर्मा जयंती भी कहते हैं. इस बार विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर 2019 को मंगलवार के दिन मनाई जा रही है. विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है. इसलिए इस दिन उद्योगों, फैक्ट्र‍ियों और हर तरह ...

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श्राद्ध में न पड़ जाए शनि की टेढ़ी नजर

यदि जन्म कुंडली में शनि मेष राशि मे बैठकर पंचम भाव पर अपनी नजर डालें. पंचम भाव का स्वामी नीच के शनि से दृष्ट हो तो विद्या प्राप्ति में बाधा आती हैं. पंचम भाव का स्वामी और बृहस्पति शुभ भावों में ना होने के कारण विद्या प्राप्ति में विलंब करते हैं. मजदूरों का हक मारने और किसी का पैसा जमीन ...

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अनंत चतुर्दशी 2019: जानें क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा की सही विधि

भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी मनाते हैं. इस साल अनंत चतुर्दशी का व्रत इस 12 सितंबर यानी गुरुवार को पड़ रहा है. इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा होती है. इस दिन बप्पा का विसर्जन भी किया जाता है, ऐसे में अनंत चतुर्दशी का महत्व बढ़ जाता है. मान्यता है कि इस व्रत को ...

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