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Atal Tunnel Inauguration: अटल सुरंग देश को समर्पित,अटल जी का सपना आज पूरा हुआ:PM मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज समुद्र तल से करीब दस हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर बनी विश्व की सबसे लंबी 9.02 किलोमीटर की अटल टनल रोहतांग (Atal Tunnel Rohtang) को देश को समर्पित किया। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुभारंभ समारोह के बाद अटल टनल से नॉर्थ पोर्टल के लिए रवाना हुए। उन्होंने इस दौरान टनल के नीचे बनाई गई आपातकालीन टनल का निरीक्षण भी किया। उन्होंने लाहुल स्पिति जिले में टनल के दूसरे छोर नॉर्थ पोर्टल पहुंचने के बाद बस को हरी झंडी दिखाई। इस बस में 14 बुर्जर्गों ने सफर किया।

पीएम मोदी ने बीआरओ को सुझाव दिया कि 1500 ऐसे लोगों को चिंहित करें, जो अपना अनुभव लिखें। इसमें मजदूरों और इंजीनियरों को शामिल करें। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय से आग्रह किया कि तकनीकी शिक्षा से जुड़े स्टूडेंट्स से इस टनल की केस स्टडी करवाएं। इससे दुनिया को हमारी ताकत की जानकारी होना चाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज समुद्र तल से करीब दस हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर बनी विश्व की सबसे लंबी 9.02 किलोमीटर की अटल टनल रोहतांग (Atal Tunnel Rohtang) को देश को समर्पित किया। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुभारंभ समारोह के बाद अटल टनल से नॉर्थ पोर्टल के लिए रवाना हुए। उन्होंने इस दौरान टनल के नीचे बनाई गई आपातकालीन टनल का निरीक्षण भी किया। उन्होंने लाहुल स्पिति जिले में टनल के दूसरे छोर नॉर्थ पोर्टल पहुंचने के बाद बस को हरी झंडी दिखाई। इस बस में 14 बुर्जर्गों ने सफर किया।

पीएम मोदी ने बीआरओ को सुझाव दिया कि 1500 ऐसे लोगों को चिंहित करें, जो अपना अनुभव लिखें। इसमें मजदूरों और इंजीनियरों को शामिल करें। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय से आग्रह किया कि तकनीकी शिक्षा से जुड़े स्टूडेंट्स से इस टनल की केस स्टडी करवाएं। इससे दुनिया को हमारी ताकत की जानकारी होना चाहिए।

पीएम मोदी बोले, यह मेरा सौभाग्य है जो अटल टनल के लोकार्पण का अवसर मिला। बतौर भाजपा प्रभारी मेरा हिमाचल से गहरा नाता रहा। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल हमेशा प्रधानमंत्री अटल जी से सुरंग निर्माण का आग्रह करते थे और बाद में यह प्रोजेक्ट उनका सपना बन गया। आज अटल जी का यह सपना पूरा हो गया। सिर्फ अटल जी ही नहीं, हिमाचल प्रदेश के करोड़ों लोगों का सपना पूरा हो गया। अटल सरकार के जाते ही टनल के काम को भूला दिया गया। 2013 तक इसका काम धीमी गति से होता रहा, यदि उसी गति से काम चलते तो काम पूरा होने में अभी दो दशक और लगते।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा इस टनल के निर्माण कार्य कि चिंता की। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्वागत भाषण दिया।

प्रधानमंत्री ने अटल टनल की प्रदर्शनी की अवलोकन किया। बॉर्डर रोड़ ऑर्गेनाइजेशन (BRO) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अटल टनल के निर्माण के इतिहास की जानकारी दी। इस अवसर पर CDS जनरल बिपिन रावत भी मौजूद थे।

प्रधानमंत्री सुबह 8 बजे चंडीगढ़ एयरपोर्ट पहुंचे। वे इसके कुछ देर बाद हेलीकॉप्टर से मनाली रवाना हुए। मनाली में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और हिमाचल प्रदेश सरकार के मंत्रियों और सांसदों ने पीएम मोदी का स्वागत किया। इस मौके पर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर भी उपस्थित थे। इसके बाद पीएम मोदी अटल टनल रोहतांग के साउथ पोर्टल पहुंचे।

पीएम मोदी दोपहर में सिस्सू में जनसभा को संबोधित करेंगे। उनका इसके बाद सोलंगनाला में भाजपा नेताओं को संबोधित करने का कार्यक्रम हैं।
इससे छह माह तक बर्फ की कैद में रहने वाले जनजातीय जिले लाहुल-स्पीति के लोगों की राह रोहतांग दर्रा नहीं रोक सकेगा। चीन सीमा तक सैन्य वाहन व रसद पहुंचाना भी आसान होगा। प्रधानमंत्री मोदी उद्घाटन के बाद विशेष वाहन से सुरंग को निहारेंगे। इसके अंदर बनी आपातकालीन सुरंगों का भी जायजा लेंगे। पीर पंजाल की पहाड़ियों में बनी यह सुरंग लाहुल घाटी समेत चंबा जिले की किलाड़ व पांगी घाटी में विकास की नई गाथा लिखेगी। सुरंग भारतीय सेना को मजबूती देगी। सैन्य वाहनों को सीमा तक पहुंचने में कम समय लगेगा।

चार घंटे का सफर 45 मिनट में :

सुरंग बन जाने से मनाली की लेह से 46 किलोमीटर दूरी कम हो जाएगी। बड़े वाहन चार घंटे के बजाय मात्र 45 मिनट में कोकसर पहुंच सकेंगे।

800 करोड़ बचाए :

सुरंग निर्माण पर करीब चार हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था, लेकिन यह 3200 करोड़ रुपये में तैयार की गई है। शुरुआती चरण में लागत लगभग 1400 करोड़ रुपये आंकी गई थी। सुरंग के ठीक ऊपर स्थित सेरी नाला से पानी के रिसाव के कारण निर्माण में लगभग पांच साल की देरी हुई।

अटलजी ने की थी घोषणा, सोनिया ने रखी थी आधारशिला :

सुरंग के निर्माण की घोषणा अटल बिहारी वाजपेयी ने तीन जून 2000 को की थी। 26 मई 2002 को उन्होंने सुरंग के साउथ पोर्टल तक बनने वाली सड़क की आधारशिला भी रखी थी। जून 2010 में सोनिया गांधी ने सुरंग की आधारशिला रखी थी।

यह भी जानें :

-25 दिसंबर 2019 को इसका नाम अटल टनल रोहतांग रखा गया।

-80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सुरंग से गुजर सकेंगे वाहन।

-3000 वाहन प्रतिदिन दिन हो सकेंगे आर-पार।

-दो किलोमीटर के बाद वाहन मोड़ने की सुविधा।

-500 मीटर की दूरी पर इमरजेंसी निकास द्वार।

-एक किलोमीटर के बाद लगेगा ट्रैफिक इंटेंसिटी डिटेक्शन सिस्टम।

-हिमस्खलन से बचने के लिए स्नो गैलरी का निर्माण।

ये होंगे लाभ :

-चीन सीमा तक आसानी से पहुंच सकेंगे सैन्य वाहन व रसद।

-46 किलोमीटर कम होगी मनाली से लेह की दूरी।

-25 रुपये में सिस्सू से मनाली पहुंचेंगी आलू की बोरी, पहले 70 रुपये लगता था भाड़ा।

-एक दिन में ऊना से तांदी पहुंचेंगे रसोई गैस सिलेंडर, पहले लगते थे दो दिन।

-लाहुल के किसान मंडियों तक पहुंचा सकेंगे सब्जियां, पहले रोहतांग दर्रा पर बर्फबारी के चलते सड़ती थीं खेतों में।

सिंह पलचान और चंद्रा पुल तक गए भी, लेकिन दारचा पुल अधिक दूर होने के कारण लौट आए. बाद में उन्होंने कहा कि मान लिया जाएगा कि अटल टनल के साथ ही तीनों पुलों का उद्घाटन हो गया है.

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