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2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर तक बंजर जमीन को जोतने योग्य बनाएगा भारत : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को देश में बंजर जमीन को उपयोग में लाये जा सकने योग्य बनाने के लक्ष्य में इजाफे की घोषणा करते हुए कहा है कि भारत 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन को दुरुस्त करेगा। भारत ने पहले 2.1 करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन को उपयोग में लाये जा सकने योग्य बनाने का लक्ष्य तय किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने यहां मरुस्थलीकरण की रोकथाम पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित सम्मेलन (कॉप-14) की उच्चस्तरीय बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘भारत अब 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि को दुरुस्त करने की महत्वाकांक्षा रखता है।’’
इसके अंतर्गत जमीन की उत्पादकता और जैव प्रणाली को बहाल करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें बंजर हो चुकी खेती की जमीन के अलावा वन क्षेत्र और अन्य परती जमीनों को केन्द्र में रखा जाएगा। सम्मेलन में सेंट विंसेंट एंड ग्रेनाडिनेस के प्रधानमंत्री राल्फ गोंज़ाल्विस, संयुक्त राष्ट्र की उपमहासचिव अमीना जेन मोहम्मद, यूएनसीसीडी के कार्यकारी सचिव इब्राहीम थेव, लगभग 90 देशों के पर्यावरण मंत्रियों के अलावा लगभग 200 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, एवं राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो भी मौजूद थे। प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने पर्यावरण संरक्षण पर आयोजित रियो सम्मेलन के सभी तीन प्रमुख मुद्दों (जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और भूमि क्षरण) का समाधान निकालने के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि इसके लिए ‘कॉप’ के जरिए भारत ने वैश्विक बैठकों की मेज़बानी की है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और भूमि क्षरण के मुद्दों के समाधान में सहयोग की पहल करना भारत के लिए खुशी की बात है।’’

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत उपग्रह और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी किफायती प्रौद्योगिकी के जरिए भूक्षरण के समाधान में मित्र देशों के लिए मददगार बन सकता है। इस दौरान उन्होंने जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यूएनसीसीडी को वैश्विक जल एजेंडा बनाने पर विचार करन चाहिए, जिससे कि भूक्षरण के नियंत्रण की कारगर रणनीति बनायी जा सके।

उन्होंने कहा, ‘‘जब हम बंजर भूमि की समस्या हल करते हैं, तब हम जल की कमी की समस्या भी हल करते हैं। जलापूर्ति बढ़ाना, जल की पुनःपूर्ति करना, जल अपव्यय को कम करना और मिट्टी की नमी को कायम रखना, भूमि तथा जल रणनीति का अहम हिस्सा हैं।”

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