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योग को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आधिकारिक मान्यता देने से सारा विश्व इसके लाभों से आज लाभान्वित हो रहा है

योग हमारी प्राचीन परंपरा का अमूल्य उपहार है:-
संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा में 27 सितंबर, 2014 को प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने प्रस्ताव पेश
किया था कि संयुक्त राष्ट्र को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुरूआत करनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र
महासभा में अपने पहले भाषण में मोदी ने कहा था कि ‘‘भारत के लिए प्रकृति का सम्मान अध्यात्म
का अनिवार्य हिस्सा है। भारतीय प्रकृति को पवित्र मानते हैं।’’ उन्होंने कहा था कि ‘‘योग हमारी प्राचीन
परंपरा का अमूल्य उपहार है।’’ यूएन में प्रस्ताव रखते वक्त मोदी ने योग की अहमियत बताते हुए कहा
था, ‘‘योग मन और शरीर को, विचार और काम को, बाधा और सिद्धि को ठोस आकार देता है। यह
व्यक्ति और प्रकृति के बीच तालमेल बनाता है। यह स्वास्थ्य को अखंड स्वरूप देता है। इसमें केवल
व्यायाम नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मनुष्य के बीच की कड़ी है। यह जलवायु परिवर्तन से लड़ने में
हमारी मदद करता है।’’
प्रस्ताव रिकार्ड समय और समर्थन से पारित :-
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र में इस आशय के प्रस्ताव को लगभग सर्वसम्मति से
स्वीकार कर लिया था। भारत के साथ रिकार्ड 177 सदस्य देश न केवल इस प्रस्ताव के समर्थक बने
बल्कि इसके सह-प्रस्तावक भी बने थे। इस मौके पर तत्कालीन संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून
ने कहा था कि, ‘‘इस क्रिया से शांति और विकास में योगदान मिल सकता है। यह मनुष्य को तनाव से
राहत दिलाता है।’’ बान की मून ने सदस्य देशों से अपील की कि वे योग को प्रोत्साहित करने में मदद
करें। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मानने के लिए 21 जून का दिन को इसलिए चुना गया क्योंकि 21 जून
साल का सबसे लंबा दिन होता है और समझा जाता है कि इस दिन सूरज, रोशनी और प्रकृति का धरती
से विशेष संबंध होता है। इस दिन को किसी व्यक्ति विशेष को ध्यान में रख कर नहीं, बल्कि प्रकृति को
ध्यान में रख कर चुना गया है।
‘करो योग – रहो निरोग’ के वाक्य को सारी दुनिया आत्मसात करती जा रही है:-

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाने को मंजूरी प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव के मात्र तीन महीने के अंदर दे दी। इसी के साथ भारत की सेहत से भरपूर प्राचीन
विद्या योग को वैश्विक मान्यता मिल गई थी। भारत में वैदिक काल से मौजूद योग विद्या एक जीवन
शैली है जिसे प्रधानमंत्री मोदी जी ने नया मुकाम दिलाया। स्वामी रामदेव तथा आचार्य बालकृष्ण
द्वारा सारे विश्व में योग, आयुर्वेद तथा स्वदेशी को घर-घर में पहुंचाने में अनुकरणीय योगदान है।
‘करो योग – रहो निरोग’ के वाक्य को सारी दुनिया आत्मसात करती जा रही है। आयुष मंत्रालय, भारत
सरकार, भारत स्वाभिमान (न्यास), पतंजलि योग पीठ, आर्ट आॅफ लीविंग के आध्यात्मिक गुरू श्री
श्री रविशंकर आदि-आदि के द्वारा प्रत्येक जिले, तहसील तथा गांव में योग को पहुंचाने का कार्य हो रहा
है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि निकट भविष्य में योग के द्वारा सारी धरती रोग से मुक्त होगी।
योग स्वास्थ्य के लिए जरूरी :-
वैश्विक स्वास्थ्य और विदेश नीति के एजेंडा के तहत स्वीकार किए गए इस प्रस्ताव में कहा
गया है कि योग स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सभी जरूरी ऊर्जा प्रदान करता है। 21 जून को अन्तर्राष्ट्रीय
योग दिवस घोषित करने के अलावा प्रस्ताव में कहा गया है कि योग के फायदे की जानकारियां फैलाना
दुनिया भर में लोगों के स्वास्थ्य के हित में होगा। योग केवल आसन और मुद्राओं तक सीमित नहीं है।
यह तो एक आदर्श जीवन शैली है, जो मानवीय उत्थान की ओर ले जाती है। आज के समय लोगों ने
भौतिक जगत में बहुत ऊंचाई हासिल कर ली है, लेकिन अपने अंदर झांकने का मौका केवल भारतीय
संस्कृति ही देती है। योग और ध्यान न केवल हमारा स्वास्थ्य संवर्धन करते हैं बल्कि हमें आंतरिक
और मानसिक बल भी प्रदान करते हैं। काफी समय से ऋषि परंपरा और आध्यात्म को बढ़ाने के प्रयास
हो रहे हैं। वास्तव में योग एवं आध्यात्म की शिक्षा में पूरी मानवता को एकजुट करने की शक्ति है। योग
में ज्ञान, कर्म और भक्ति का समागम है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा आधिकारिक मान्यता योग के लाभ को विश्व भर में फैलाएगी:-
संयुक्त राष्ट्र के घोषणा करने के बाद आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर ने श्री नरेंद्र मोदी जी
के प्रयासों की सराहना करते अुए कहा- किसी भी दर्शन, धर्म या संस्कृति के लिए राज्य के संरक्षण के
बिना जीवित रहना बहुत मुश्किल है। योग लगभग एक अनाथ की तरह अब तक अस्तित्व में था। अब
संयुक्त राष्ट्र द्वारा आधिकारिक मान्यता योग के लाभ को विश्व भर में फैलाएगी।
दो गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिकार्ड्स बनाने का कीर्तिमान बनाया:-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गणमान्य लोगों सहित करीब 36,000 लोगों ने 21 जून 2015 को
नई दिल्ली में पहले अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर 35 मिनट तक 21 योग आसन (योग मुद्राओं) का प्रदर्शन
किया। योग दिवस दुनिया भर में लाखों लोगों द्वारा मनाया गया। राजपथ पर हुए समारोह ने दो
गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिकार्ड्स की स्थापना की सबसे बड़ी योग क्लास 35,985 लोगों के साथ और
चैरासी देशों के लोगों द्वारा इस आयोजन में एक साथ भाग लेने का रिकार्ड भी अपने नाम किया।
वर्ष 2018 में भी योग ने गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिकार्ड्स बनाने का कीर्तिमान बनाया:-
21 जून 2018 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राजस्थान के कोचिंग हब कोटा में
एक लाख से अधिक लोगों ने राज्यस्तरीय अंतरराष्ट्रीय योग कार्यक्रम में एक साथ एक जगह पर योग
करके विश्व रिकार्ड कायम किया है। इस योग कार्यक्रम में कई कोचिंग विद्यार्थियों ने भाग लिया।
गिनीज बुक आफ वलर्ड रिकार्ड्स के दो अधिकारियों की मौजूदगी में हुए योग कार्यक्रम में योग गुरू
बाबा रामदेव और तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे को एक साथ सबसे अधिक संख्या में योग
करने पर विश्व रिकार्ड बनाने के लिये अधिकारियों ने प्रमाण पत्र दिया। कोटा के आरएसी ग्राउंड में
राज्य स्तरीय योग कार्यक्रम में एक लाख पांच हजार लोगों ने एक साथ योग करके कीर्तिमान स्थापित
किया था।
पांचवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मुख्य कार्यक्रम:-
भारत सरकार ने 21 जून को पांचवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मुख्य कार्यक्रम के
लिए झारखण्ड की राजधानी रांची का चयन किया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के
शुरू होने के बाद सरकार का पहला बड़ा राष्ट्रीय आयोजन होगा, जिसमें प्रधानमंत्री शिरकत करेंगे।
संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 21 जून को विश्वव्यापी स्तर पर योग दिवस के रूप में मनाने की मान्यता
मिलने के बाद 2015 से आयुष मंत्रालय इस दिन योग महोत्सव का मुख्य आयोजन करता है। आयूष
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमने पहले ही तैयारियां शुरू कर दी हैं और कार्यक्रम बड़े
पैमाने पर आयोजित होगा।’’
पिछले चार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जी शामिल हुए हैं:-
भारत सरकार के आयूष मंत्रालय दिल्ली में पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम
21 जून 2015 को श्री मोदी जी की अगुवाई में राजपथ पर आयोजित हुआ था। इसके बाद 2016 में
मुख्य कार्यक्रम चंडीगढ़ और 2017 में लखनऊ में तथा 2018 में देहरादून में आयोजित हुआ था।
प्रधानमंत्री मोदी जी की मौजूदगी में इन शहरों में ये कार्यक्रम हुए थे।

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