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योगी कैबिनेट :मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय

लखनऊ: 25 जून, 2019

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज यहां लोक भवन में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-

‘पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे परियोजना’ का बैंकों के माध्यम से वित्त पोषण का प्रस्ताव मंजूर
मंत्रिपरिषद ने ‘पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे परियोजना’ का बैंकों के माध्यम से वित्त पोषण के सम्बन्ध में प्रस्तुत प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा ‘पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे परियोजना’ के वित्तपोषण हेतु विहित सामान्य नियमों व शर्तों के अधीन काॅरपोरेशन बैंक को पंजाब नेशनल बैंक कन्सोर्शियम में शामिल करने व काॅरपोरेशन बैंक के 1000 करोड़ रुपए की ऋण स्वीकृति के लिए यूपीडा को अधिकृत किए जाने हेतु सैद्धान्तिक अनुमोदन दिया गया है।
इस प्रस्तावित ऋण के सापेक्ष पंजाब नेशनल बैंक कन्सोर्शियम के पक्ष में उनके द्वारा निर्धारित प्रारूप में उत्तर प्रदेश सरकार की अनुपूरक गारण्टी जारी किए जाने को भी सैद्धान्तिक अनुमति दी गई है। साथ ही, प्रस्तावित ऋण की 03 वर्ष की मोरेटोरियम अवधि में मात्र उद्भूत ब्याज राशि की अदायगी त्रैमासिक आधार पर यूपीडा द्वारा पंजाब नेशनल बैंक कन्सोर्शियम को किए जाने के लिए उ0प्र0 शासन द्वारा यूपीडा के पक्ष में बजट व्यवस्था और तत्पश्चात् मूलधन व उद्भूत ब्याज राशि तथा अन्य देयताओं की अदायगी आगामी 12 वर्षों में त्रैमासिक आधार पर 48 किश्तों (कुल समयावधि 15 वर्ष) में किए जाने हेतु यूपीडा के टोल से आय के स्रोतों में यदि किसी भी समय पर कोई कमी हो, तो उसे उ0प्र0 शासन द्वारा बजट-प्राविधान के अन्तर्गत पूर्ण किए जाने के प्रस्ताव पर सैद्धान्तिक अनुमोदन प्रदान कर दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, प्रस्तावित ऋण के पश्चात् ‘फाइनेंशियल क्लोज़र’ के लिए आवश्यक शेष धनराशि तथा परियोजना हेतु आवश्यक मार्जिन धनराशि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा यूपीडा को यथासमय उपलब्ध कराए जाने के प्रस्ताव पर भी सैद्धान्तिक अनुमोदन दिया गया है।
साथ ही, ‘विजया बैंक’ का समामेलन ‘बैंक आॅफ बड़ौदा’ के साथ हो जाने के पश्चात् ‘विजया बैंक’ द्वारा अथवा उनके पक्ष में शासन द्वारा पूर्व में निष्पादित प्रपत्रों में ‘विजया बैंक’ के स्थान पर ‘बैंक आॅफ बड़ौदा’ पढ़े जाने और ‘विजया बैंक’ पंजाब नेशनल बैंक कन्सोर्शियम में ‘विजया बैंक’ का 1000 करोड़ रुपए का प्रतिभाग समाप्त करके ‘बैंक आॅफ बड़ौदा’ का प्रतिभाग 2000 करोड़ रुपए किए जाने हेतु सैद्धान्तिक अनुमोदन को भी मंजूरी दी गई है। इस सम्बन्ध में न्याय विभाग का परामर्श प्राप्त कर अगे्रतर कार्यवाही किए जाने का निर्णय लिया गया है।
इसके अलावा, भविष्य में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे परियोजना के वित्त पोषण हेतु स्थापित पंजाब नेशनल बैंक कन्सोर्शियम में 12000 करोड़ रुपए की ऋण सीमा तक किसी भी नए पब्लिक सेक्टर बैंक को सम्मिलित करने व इस हेतु ऐसे बैंक को समाहित करके पंजाब नेशनल बैंक कन्सोर्शियम के पक्ष में आवश्यक अनुपूरक गारण्टी (सप्लीमेण्ट्री गारण्टी) व अन्य वांछित प्रपत्र जारी किए जाने के लिए वित्त विभाग के परामर्श से अनुपूरक गारण्टी स्वीकृत किए जाने के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
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सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 102 व 115 में तथा माध्यस्थम
और सुलह अधिनियम-1996 की धारा-2(ङ) में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने सिविल विधि (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक-2019 के माध्यम से सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 102 व 115 में तथा माध्यस्थम और सुलह अधिनियम-1996 की धारा-2(ङ) में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके तहत सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 102 में शब्द ‘पच्चीस हजार रुपए’ के स्थान पर शब्द ‘पचास हजार रुपए’ रखा गया है तथा सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 115 में शब्द ‘पांच लाख रुपए’ के स्थान पर शब्द ‘पच्चीस लाख रुपए’ रखा गया है। इसके अलावा, माध्यस्थम और सुलह अधिनियम-1996 की धारा-2(ङ) में न्यायालय की परिभाषा में प्रस्तावित संशोधन को भी मंत्रिपरिषद द्वारा मंजूरी दी गई है।
इस निर्णय से मा0 उच्च न्यायालय के स्थान पर जनपद न्यायालय में केसों की सुनवाई होगी, जिससे आम जनता को लाभ होगा तथा इससे लम्बित केसों के शीघ्र निस्तारण में मदद मिलेगी।
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मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की धनराशि
पी0एफ0एम0एस0 लिंक्ड स्टेट नोडल एकाउण्ट से सीधे
लाभार्थी के खाते में हस्तान्तरित करने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की धनराशि पी0एफ0एम0एस0 लिंक्ड स्टेट नोडल एकाउण्ट से सीधे लाभार्थी के खाते में हस्तान्तरित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के वर्तमान वित्तीय प्रबन्धन में संशोधन किया गया है। इस संशोधन से लाभार्थियों के खाते में धनराशि हस्तान्तरित किए जाने में होने वाले प्रक्रियात्मक विलम्ब से बचा जा सकेगा। इस प्रकार, मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों के आवास निर्माण हेतु उनके खाते में अविलम्ब धनराशि हस्तान्तरित की जा सकेगी, जिससे समयान्तर्गत आवास निर्माण प्रारम्भ एवं पूर्ण कराया जाना सम्भव हो सकेगा।
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मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद के उपयोगार्थ थार्नहिल रोड, प्रयागराज में
काॅन्फ्रेंस हाल, 02 नग वी0आई0पी0 सूइट्स एवं एक म्यूजियम के
निर्माण में उच्च विशिष्टियों के प्रयोग का प्रस्ताव अनुमोदित
मंत्रिपरिषद ने मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद के उपयोगार्थ थार्नहिल रोड, प्रयागराज में काॅन्फ्रेंस हाल, 02 नग वी0आई0पी0 सूइट्स एवं एक म्यूजियम के निर्माण में उच्च विशिष्टियों के प्रयोग के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
प्रश्नगत निर्माण कार्य मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद में योजित पी0आई0एल0 सं0-15895/2015 में मा0 उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 10 मई, 2019 के परिप्रेक्ष्य में किया जाना है। जनसामान्य की सुविधा के दृष्टिगत मा0 उच्च न्यायालय के प्रस्ताव के आधार पर प्रस्तावित प्रायोजना का निर्माण प्लाट नं0-16/14, 10 थार्नहिल रोड, प्रयागराज में किया जाना प्रस्तावित है। प्रायोजना के निर्माण हेतु पर्याप्त भूमि विवाद रहित उपलब्ध है।
प्रश्नगत प्रायोजना के निर्माण हेतु कार्यदायी संस्था के रूप में सी0एण्ड डी0एस0 उ0प्र0 जल निगम को नामित किया गया है। व्यय वित्त समिति की दिनांक 13 जून, 2019 को सम्पन्न हुई बैठक में प्रश्नगत प्रायोजना की प्रस्तावित लागत 5391 लाख रुपये के सापेक्ष संशोधित लागत 4599.88 लाख रुपये $ जी0एस0टी0 अनुमोदित किया गया। अतः परियोजना की कुल लागत 4599.88 लाख रुपये है।
प्रश्नगत प्रायोजना प्रस्ताव में प्रयुक्त उच्च विशिष्टियों यथा फाल्स सीलिंग (152.98 लाख रुपये), वुडेन फ्लोरिंग (204.59 लाख रुपये), एक्वास्टिक वाॅल पेनलिंग (26.60 लाख रुपये) चैनल्ड वुड वर्क परफोरेटेड पैनल (53.94 लाख रुपये), म्यूजियम हेतु आॅर्कीटेक्चरल फिनिश (66.88 लाख रुपये) एवं म्यूजियम हेतु ग्रेनाइट फ्लोरिंग (25.12 लाख रुपये) सम्बन्धी उच्च विशिष्टियों का प्रयोग प्रस्तावित है।
मंत्रिपरिषद द्वारा प्रश्नगत परियोजना में किसी भी प्रकार के परिवर्तन/संशोधन होने पर निर्णय लेने हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किये जाने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की है।
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मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद के उपयोगार्थ मल्टी लेवल पार्किंग एवं एडवोकेट चैम्बर
के निर्माण में उच्च विशिष्टियों के प्रयोग के प्रस्ताव को मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद के उपयोगार्थ मल्टी लेवल पार्किंग एवं एडवोकेट चैम्बर के निर्माण में उच्च विशिष्टियों के प्रयोग के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
प्रश्नगत निर्माण कार्य मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद में योजित पी0आई0एल0 सं0-15895/2015 में मा0 उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 10 मई, 2019 के परिप्रेक्ष्य में किया जाना है। मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद परिसर में मल्टी लेवल पार्किंग, एडवोकेट चैम्बर एवं रिकाॅर्ड रूम के निर्माण हेतु कार्य के विशिष्टियों के दृष्टिगत कार्यदायी संस्था के रूप में लोक निर्माण विभाग उ0प्र0 को नामित किया गया है। जनसामान्य की सुविधा के दृष्टिगत जिस भूमि पर मल्टीलेवल पार्किंग एवं एडवोकेट चैम्बर का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है, वह भूमि विवाद रहित है।
प्रायोजना का निर्माण ई0पी0सी0 मोड पर किया जाना प्रस्तावित है। व्यय वित्त समिति की दिनांक 13 जून, 2019 को सम्पन्न हुई बैठक में प्रश्नगत प्रायोजना की प्रस्तावित लागत 536.06 करोड़ रुपये के सापेक्ष संशोधित लागत 530.07 करोड़ रुपये अनुमोदित किया गया है। अतः परियोजना की कुल लागत 530.07 करोड़ रुपये प्रस्तावित है। मा0 उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के परिसर में मल्टीलेवल पार्किंग, एडवोकेट चैम्बर्स के निर्माण कार्य हेतु प्रस्तावित परियोजना में प्रयुक्त उच्च विशिष्टियों यथा फाल्स सीलिंग (897.98 लाख रुपये), स्ट्रक्चरल ग्लेजिंग (159.70 लाख रुपये) एवं ग्रेनाइट फेसिया इन लिफ्ट एरिया (16.53 लाख रुपये) सम्बन्धी उच्च विशिष्टियों के प्रयोग प्रस्तावित हैं।
मंत्रिपरिषद ने प्रश्नगत परियोजना में किसी भी प्रकार का परिवर्तन/संशोधन होने पर निर्णय लेने हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किये जाने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की है।
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विभागीय प्रकाशनों के मुद्रण हेतु निजी प्रेसों के पंजीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने विभागीय प्रकाशनों के मुद्रण हेतु निजी प्रेसों के पंजीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
प्रदेश सरकार की जनहितकारी योजनाओं, विकास कार्यक्रमों, निर्णयों एवं उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाने के लिए सूचना विभाग द्वारा समय-समय पर प्रचार-पुस्तिकाएं, फोल्डर, बुकलेट, ब्रोशर, हैण्डबिल, एलबम, कैलेण्डर व अन्य प्रचार सामग्री का प्रकाशन कराया जाता है। इस सम्बन्ध में विभागीय प्रकाशनों के मुद्रण के लिए निजी प्रेसों के पंजीकरण हेतु शासनादेश संख्या-130/उन्नीस-2-1042 /84, दिनांक 10 मार्च, 1988 जारी किया गया था, जिसे शासनादेश संख्या-299/उन्नीस-2-2002-18/2002, दिनांक 02 मई, 2002 तथा शासनादेश संख्या-496/उन्नीस-2-2002-18/2002, दिनांक 31 मई, 2002 के द्वारा अवक्रमित कर दिया गया।
प्रचार-प्रसार की आवश्यकता, कार्य की तात्कालिकता एवं मुद्रण तकनीक में आये बदलाव के दृष्टिगत विभागीय प्रकाशनों के मुद्रण हेतु निजी प्रेसों के पंजीकरण सम्बन्धी उक्त सन्दर्भित शासनादेशों दिनांक 02 मई, 2002 एवं दिनांक 31 मई, 2002 के प्रस्तर-1, 2, 3, 4, 5, 6 व 10 में कतिपय संशोधन के साथ ही नवीन प्रस्तरों 12 एवं 13 का प्राविधान किया गया है, जिसके द्वारा उक्त शासनादेश में ई-टेण्डरिंग की व्यवस्था को लागू करते हुए सूचना विभाग में मुद्रकों के श्रेणीवार पंजीकरण हेतु पिछले एक वित्तीय वर्ष का निम्न टर्नओवर निर्धारित किया गया है।
1. श्रेणी-‘क’ न्यूनतम टर्नओवर दो करोड़ रुपये मात्र।
2. श्रेणी-‘ख’ न्यूनतम टर्नओवर एक करोड़ रुपये मात्र।
3. श्रेणी-‘ग’ न्यूनतम टर्नओवर पचास लाख रुपये मात्र।
सूचना विभाग में मुद्रकों के श्रेणी ‘क’, श्रेणी ‘ख’ तथा श्रेणी ‘ग’ में पंजीकरण हेतु, मुद्रक का ई0एस0आई0, ई0पी0एफ0 तथा फैक्ट्री एक्ट एवं जी0एस0टी0 में पंजीकरण होना आवश्यक होगा।
मंत्रिपरिषद ने भविष्य में यथावश्यक किसी भी प्रकार के संशोधन के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृत प्रदान की है।

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