Breaking News
Home » Amazing » भारत के दक्षिण में स्थित ‘कुमारी कंदम’ महाद्वीप से हुआ था मानव सभ्यता का विकास, अफ्रीका से नहीं…

भारत के दक्षिण में स्थित ‘कुमारी कंदम’ महाद्वीप से हुआ था मानव सभ्यता का विकास, अफ्रीका से नहीं…

वैज्ञानिकों और पुरातत्ववेताओं के अनुसार मानव सभ्यता का उद्गम और विकास अफ्रीका महाद्वीप में हुआ था. इसके बाद कालान्तर में मानव पूरे पृथ्वी ग्रह पर फ़ैल गया. इस तथ्य का खंडन करते हुए कुछ विद्वानों और तमिल लेखकों ने दावा किया है कि आधुनिक मानव सभ्यता का विकास हिन्द महासागर में स्थित ‘कुमारी कंदम’ नामक महाद्वीप पर हुआ था. हालांकि कुछ लोग इसे महज़ एक काल्पनिक सभ्यता मानते हैं. आज हम इसी सभ्यता के अस्तित्व से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य बतायेंगे, जिनको जानने के बाद इस महाद्वीप के अस्तित्व को लेकर और भी जिज्ञासा आपके मन में बढ़ जाएगी.

Atlantis, Lemuria प्राचीन इतिहास की ऐसी खोई हुई सभ्यताएं रही हैं, जिनकी वजह से लोगों का आज भी हिस्ट्री में इंटरेस्ट बना हुआ है. Atlantis के बारे में सबसे पहले महान ग्रीक दार्शनिक प्लेटो ने ज़िक्र किया था. Atlantis की तरह ही भारत के दक्षिण में Lemuria की सभ्यता थी, जो कि ‘कुमारी कंदम’ नामक महाद्वीप पर फैली थी.

कुमारी कंदम के राज़ से जुड़े कुछ तथ्य ऐसे हैं, जो इसके किसी समय वास्तविक रूप में होने के प्रमाण देते हैं.

1. Atlantis की तरह ही Lemuria और कुमारी कंदम भी एक रोचक और रहस्यमयी ऐतिहासिक विवाद का विषय रहा है. तमिल विद्वानों के अनुसार कुमारी कंदम प्राचीन तमिल लोगों का घर हुआ करता था. समय के साथ समुद्र का जल स्तर बढ़ने से यह महाद्वीप जलमग्न हो गया.

2. यह रहस्यमयी महाद्वीप आधुनिक भारत के दक्षिण में हिन्द महासागर के क्षेत्र में हुआ करता था.

3. कालान्तर में जब समुद्र का जल स्तर बढ़ता गया, तो यहां के बाशिंदे धीरे-धीरे संसार के बाकी क्षेत्रों की तरफ़ पलायन कर गये.

4. प्राचीन साहित्य में कुमारी कंदम को अन्य नामों से भी सम्बोधित किया गया है. कुछ जगहों पर इसे ‘कुमारीक्कनटम’ कहा गया है तो कुछ जगह ‘कुमारी नाडू’ भी कहा गया है.

5. इतिहास में सबसे पहले ‘कुमारी कंदम’ शब्द का ज़िक्र स्कन्द पुराण के 15वीं सदी में आये संस्करण में देखने को मिलता है. सनातन धर्म के सभी 18 पुराणों में इस पुराण को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. इसे कचिअप्पा सिवाचार्यारा द्वारा लिखा गया था.

6. प्रचलित मतों के अनुसार ‘कुमारी कंदम’ शब्द संस्कृत के ‘कुमारिका खंड’ से बना है.

7. कुमारी कंदम को ‘किंगडम ऑफ द अर्थ’ कहा जाता था.

8. कुमारी कंदम को सभी सभ्यताओं की जननी के तौर पर देखा जाता था. जिस तरह घर के पालने में बच्चा बढ़ता है, उसी तरह कुमारी कंदम से ही मानव सभ्यता आगे बढ़ी थी.

9. कई विद्वानों का मत है कि तमिल सबसे पहले एक सभ्यता के तौर पर विकसित हुए थे, जिनका निवास स्थान कुमारी कंदम महाद्वीप था. जैसे-जैसे ग्लेशियर की बर्फ पिघलने लगी, समुद्र का जलस्तर भी बढ़ने लगा. इस वजह से यहां के निवासी माइग्रेट कर के चले गये. आगे चल कर यह पूरा महाद्वीप पानी में समा गया.

10. आधुनिक समय में इसके बारे में तब ज़िक्र आया जब शोधकर्ताओं ने भारत, अफ्रीका और मेडागास्कर के मध्य जियोलॉजिकल और बायोलॉजिकल समानताएं देखीं.

11. तमिल और संस्कृत साहित्यों में भी इन तीनों क्षेत्रों के मध्य सम्बन्ध बताये गये हैं. लोगों का मानना है कि ये एक ऐसा महाद्वीप था, जो कि इन तीनों क्षेत्रों को आपस में जोड़ता था.

12. जब तक इस महाद्वीप को समुद्र ने अपनी विशाल जलराशि में डुबो नहीं दिया, तब तक तमिल लोगों का यही एकमात्र घर हुआ करता था.

13. कुछ आधुनिक विद्वानों का मानना है कि यह मत केवल एक सुनी-सुनाई बात है. इसमें कोई भी ठोस प्रमाण देखने को नहीं मिले हैं.

14. इसके समर्थन में सबसे मज़बूत पक्ष प्राचीन तमिल और संस्कृत साहित्य ही मिलते हैं.

15. इसके पक्ष में यह प्रमाण भी दिया जाता है कि कुमारी कंदम आज के राम सेतु का हिस्सा था, जो कि भारत और श्रीलंका के मध्य स्थित है.

ब्रिटिश भूगोलवेता फिलिप स्क्लाटर की किताब ‘The Mammals of Madagascar’ में भी Lemuria के बारे में ज़िक्र मिलता है. यह किताब सन 1864 में प्रकाशित हुई थी. इस किताब के अनुसार कुमारी कंदम का विस्तार कन्याकुमारी से लेकर पश्चिम में ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी तट और मेडागास्कर तक फैला हुआ था.

इस तरह अनेक साक्ष्य और भी हैं जो यह दावा करते हैं कि भारत के दक्षिण में एक महाद्वीप और था जो अफ्रीका और मेडागास्कर के मध्य स्थित था. आने वाले समय में शोधकर्ता इस क्षेत्र में जैसे-जैसे नई-नई खोज करते रहेंगे, हमें और भी नए-नए रहस्यों के बारे में पता चलता रहेगा

 

Dhamaka News

About dhamaka