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फरवरी और मार्च के आरंभिक दो हफ्ते को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है… (पवन सिंह)

भारत सरकार ने फरवरी और मार्च माह के आरंभिक दो हफ्तों के मूल्यवान समय खो दिया। जनवरी में जब भारत में कोरोना वायरस का पहला केस आया था तभी भारत सरकार के कान खड़े होने चाहिए थे लेकिन डब्लूएचओ पर काबिज चीनी निदेशक ने भारत सहित पूरे विश्व को अंधेरे में रखा कि यह वायरस मैंने टू मैंने नहीं फैलता है। मामला बिगड़ता गया और फरवरी में WHO ने सचेत किया था लेकिन भारत सरकार ने ओवर रिएक्शन कह कर हल्के में लिया था। फरवरी में “एक नेता” ने लोकसभा में कोरोना से तैयारी के बारे में सरकार से सवाल किया था लेकिन सरकार ने उसका मजाक उड़ाया था…..65 हजार लोगों को विदेशों से भारत वापस लेकर आई….. वहां फिर मिसमैंनेजमेंट हुआ….इन सभी को 20 दिन हर एअरपोर्ट के बाहर टेंट सिटी बनाकर रोक देना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। थर्मल चेकिंग कर के व हाथ में मुहर लगा कर कहा गया कि घर में खुद को एकांत में रखिए लेकिन हवाई जहाजों से उतरे लोग कहां मानने वाले थे….बेबी डाल कनिका कपूर जो कि लखनऊ से कानपुर और नोएडा तक टहलती रहीं….तमाम‌ नेता पीछे पीछे लार टपकाते हुए टहलते रहे…. फिलहाल कोरोना गर्ल पीजीआई लखनऊ में चौथा पाजटिव टेस्ट लेकर लेटी हुई हैं…उत्तर प्रदेश निवासी और केरल कैडर के आईएएस अफसर सिंगापुर और मलेशिया हनीमून मना कर लौटे….सरकार ने उनसे एकांत में रहने को कहा वे टहलते हुए अपने गृह जनपद सुल्तानपुर पहुंच गए। केरल सरकार ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। …. हवाई जहाजों से उतरी भीड़ गरीबों को लेकर डूब गई….जब सरकारें कुंभ में 3 करोड़ लोगों के लिए टेंट सिटी बना सकती थीं तो इन 65 हजार हवाई बमों के लिए भी एअरपोर्ट के बाहर टेंट सिटी बना सकती थीं…..कितना दुख होता है कि हवाई जहाजों से लोगों को मुफ्त लाया जाता है लेकिन गरीब 100 से 600 किलोमीटर पैदल चलकर जाता है….जो बसें चलाई जाती हैं वो इन गरीबों से किराए वसूलती हैं….हल्ला मचता है तो मुफ्त सेवा का आदेश जारी किया जाता है …..24 मार्च को आदरणीय मोदी जी टीवी पर आते हैं और अचानक 14 अप्रैल, 2020 तक बंदी करने व 15000 करोड़ रुपए के उपकरण खरीदने की घोषणा करके चले जाते हैं….. लेकिन यह उपकरण जैसे वेंटीलेटर और पीपीई कोई रातों-रात सप्लाई हो नहीं सकते ….26 तारीख को दिल्ली एम्स के रेजीडेण्ट डाक्टर्स खुद चंदा करके आवश्यक प्राथमिक चीजें कुछ दिनों के लिए खरीद लेते हैं….. केजीएमयू लखनऊ का मेडिकल व पैरामेडिकल स्टॉफ खुद एक दिन का वेतन दान देकर जरूरी चिकित्सा सामग्री खरीदता है……अचानक बंदी की घोषणा कोरोना वायरस से लड़ने के प्रयास को फेल कर चुकी हैं… देश की जनता को हर बार सरप्राइज देने की आदत दूसरी बार आत्मघाती साबित होगी…..पहली थी नोटबंदी, दूसरी थी जीएसटी (जिसमें अब तक 265 से ज्यादा छोटे-बडे संशोधन सरकार ने किए)…और तीसरी ये अचानक का लाक डाउन….. सरकार ने जनवरी-फरवरी का मूल्यवान समय गंवा दिया…..घर में 500 आदमियों की दावत करने में आदमी एक माह पहले से तैयारी करता है … यहां 135 करोड़ की आबादी के खाने पीने का सवाल था……गरीब और मध्यम दर्जे की अवाम को लगा कि… लगता है तीन माह का लाक डाउन होगा तो लोग राशनिंग पर जुट गए…. मजदूर अपने बच्चों को लेकर घरों की ओर कूच कर गए….दिल्ली सरकार और 27 तारीख, मार्च,2020, समय 6 बजकर 19 मिनट सायं गाजियाबाद डीएम साहेब का एक ट्विट वायरल हुआ कि लालकुआं से बसें मिलेंगी तो भीड़ सड़कों पर उमड़ पड़ी….. यहां मैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करना चाहूंगा कि वह खुद सड़क पर उतरे और मोर्चा संभाला……एक कहावत कही जाती है समय मूल्यवान होता है …वह कभी वापस नहीं आता…. इतना बड़ा निर्णय लेने से पहले केंद्र सरकार ने यदि सभी राज्यों से सलाह-मश्विरा करके एक योजनाबद्ध तरीके से काम किया होता और जनवरी-फरवरी में ही कदम उठा लिये होते तो यह हालत नहीं होती….. मैंने पहले भी लिखा था फिर लिख रहा हूं कि लौटी भीड़ गांवों-कस्बों में इसका प्रसार न करे… नहीं तो स्थिति बहुत भयावह होगी….इटली और स्पेन पीछे छूट जाएगा….. मैंने “भगवान” की आलोचना नहीं की है सिर्फ यह इंगित किया है कि मिस मैनेजमेंट और अनुभव हीनता बहुत मंहगी पड़ेगी…
बात मजदूरों की-
दिल्ली से हजारों हजार मजदूरों का पलायन हुआ है तो 60 हजार मजदूर गुजरात से, 72 से अधिक महाराष्ट्र से और करीब एक लाख मजदूरों ने पश्चिम बंगाल से पदयात्राएं की हैं….कारण यह रहा कि उनके‌ दिमाग में यह बैठा कि यह लाक आऊट तीन माह का है….उनका यह संशय भगदड़ का बड़ा कारण बना….

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