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नकारात्मक चीजों पर अधिक सोचने से याददाश्त हो सकती है ख़राब

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घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहा करते हैं कि बुरी चीजों को याद न करें। हेल्थ के मामले में भी यही बात सच है। अब वैज्ञानिकों ने भी माना है कि नकारात्मक चीजों को बार-बार सोचने से भविष्य में डिमेंशिया हो सकता है। अल्जाइमर एंड डिमेंशिया जर्नल में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि नकारात्मक चीजों को जान-बूझकर बार-बार सोचने की आदतों का सीधा संबंध बाद के जीवन की संज्ञात्मक क्षमता (याददाश्त) से जुड़ा हुआ है। यानी जिंदगी की नकारात्मक सोच को बार-बार लाने से इंसान में 55 की उम्र के बाद संज्ञात्मक क्षमता प्रभावित होने लगती है।

रिसर्च के मुताबिक, नकारात्मक चीजों को सोचने से दिमाग में दो तरह के खतरनाक प्रोटीन जमा होने लगते हैं, जो बाद में अल्जाइमर बीमारी का कारण बनते हैं। इस रिसर्च की मुख्य लेखक यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन की नताली मर्चेंट ने बताया कि हमने अपनी रिसर्च में सोचने के खास पैटर्न की पहचान की है, जिसमें अवसाद और चिंता महत्वपूर्ण कारक बनकर उभरे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग अवसाद और चिंता से ग्रस्त होते हैं, उन्हें बाद में डिमेंशिया का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

इस रिसर्च में शोधकर्ताओं ने 292 लोगों को शामिल किया। इनकी उम्र 55 साल से अधिक थी। रिसर्च में नकारात्मक सोच का खास संबंध अल्जाइमर के साथ देखा गया। रिसर्च में पाया गया कि जिन व्यक्तियों के दिमाग में दो खतरनाक प्रोटीन जमा होने लगे, उनमें याददाश्त की क्षमता तेजी से घटने लगी। जिन लोगों में ये दोनों प्रोटीन ज्यादा मिले, उन्हें बाद में डिमेंशिया का शिकार होना पड़ा।

रिसर्च में शामिल लोगों से दो साल के बाद नकारात्मक यादों से संबंधित कई सवाल पूछे गए। उनसे पूछा गया कि आप नकारात्मक अनुभवों को अपने जीवन में किस तरह याद करते थे। जो लोग अपने पूर्व के नकारात्मक चिंतनों से ज्यादा परेशान और चिंतित थे, उनमें वे प्रोटीन ज्यादा मात्रा में पाए गए। जब इन लोगों के दिमाग का ब्रेन स्कैन किया गया तो इनमें से 113 डिमेंशिया से पीड़ित लोगों का सीधा संबंध नकारात्मक सोच से था। इस रिसर्च को चार साल के दौरान पूरा किया गया।

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