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जलवायु परिवर्तन के लिए भारत जिम्मेदार नहीं: प्रकाश जावड़ेकर

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शुक्रवार को लोकसभा में घोषणा की कि भारत जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार नहीं है, साथ ही कहा कि देश का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन दो टन से अधिक नहीं है जो अमेरिका, यूरोप और चीन की तुलना में बहुत कम है। वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पर तीसरे दिन भी लोकसभा में चर्चा चली, जिस पर लोकसभा को संबोधित करते हुए जावड़ेकर ने यह टिप्पणी की।

इस मुद्दे पर चर्चा कांग्रेस के मनीष तिवारी ने मंगलवार को शुरू की थी। चर्चा दूसरे दिन गुरुवार को फिर से शुरू हुई। इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब देने से पहले, जावड़ेकर ने पहली बार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के बीच अंतर को परिभाषित करते हुए कहा कि कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन बढऩे के कारण जलवायु परिवर्तन होता है।

उन्होंने कहा कि कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल में लगभग 100 वर्षों से मौजूद है, लेकिन प्रदूषक वायुमंडल में थोड़े समय के लिए पाए जाते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। मंत्री ने कहा कि कोयले और बैरंग गैस के जलने से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्पादन बढ़ा है, जिसकी शुष्क हवा की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत अधिक घनत्व है – जो वायुमंडल में बसा है।

उन्होंने कहा, गैस ने पर्यावरण में ऊपर जा रही पृथ्वी से उत्पन्न गर्मी को रोक दिया। इसका परिणाम यह है कि गर्मी बढ़ रही है। यह जलवायु परिवर्तन का सहज कारण है। जावड़ेकर ने कहा, भारत जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार नहीं है, क्योंकि देश का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्पादन दो टन से अधिक नहीं है जो अमेरिका में 16 टन, यूरोप में 13 टन और चीन में 12 टन है।

मंत्री ने चर्चा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहली बार है कि किसी मुद्दे पर चर्चा लोकसभा में तीन दिनों तक जारी रही। जावड़ेकर ने प्रकृति पर महात्मा गांधी के एक उद्धरण का हवाला देते हुए कहा कि प्रकृति हर किसी की जरूरतों का ख्याल रख सकती है, लेकिन हर किसी के लालच का नहीं।

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