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गणित को उंगलियों पर नचाने वालीं वंडर कम्प्यूटर थीं शकुन्तला देवी,जानिए उनके बारे में कुछ रोचक जानकारी

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यह भारत की महिलाओं की जीत है। गणित को उंगलियों पर नचाने वालीं शकुन्तला देवी सिने पर्दे पर जीवित होंग
शकुंतला देवी का जन्म 4 नवंबर 1929 को मैसुरु में हुआ था। उनके पिता सर्कस के कलाकार थे। जब वह सिर्फ 3 सालों की थी तो उनके पिता ने उनकी प्रतिभा को भांप लिया था।

शकुंतला देवी की जीवनी - Shakuntala Devi ...

उनके पिता ने सर्कस छोड़ दिया और बेटी को अपने साथ रोड शोज में ले जाने लगे जहां उन्होंने अपनी बेटी की कैलकुलेशन की प्रतिभा का प्रदर्शन किया। जब वह सिर्फ 6 साल की थीं तो मैसुरु यूनिवर्सिटी में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था। आइए उनके बारे में कुछ रोचक बातें जानते हैं…
उन्होंने साल 1977 में साउदर्न मेथॉडिस्ट यूनिवर्सिटी, डल्लास में 201 अंकों की एक संख्या का महज 50 सेकंडों में 23वां वर्गफल निकाल दिया। इसी सवाल को हल करने में यूनिवैक कंप्यूटर ने 62 सेकंड लिया था यानी उन्होंने कंप्यूटर को भी पीछे छोड़ दिया। उनके जवाब को चेक करने के लिए अमेरिकी ब्यूरो को यूनिवैक कंप्यूटर के लिए एक खास प्रोग्राम लिखना पड़ा।

तीन साल बाद 18 जून, 1980 को उन्होंने गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया। उन्होंने 13 अंकों की दो संख्याओं 7,686,369,774,870 और 2,465,099,745,779 का गुणनफल सिर्फ 28 सेकंड में निकाल दिया। इसका जवाब था 18,947,668,177,995,426,462,773,730।

5 अक्टूबर, 1950 को बीबीसी की हॉस्ट लेसली मिशेल ने उनको मैथ एक जटिल सवाल दिया। शकुंतला देवी ने सेकंडों के अंदर उसको हल कर दिया। लेकिन उनका जवाब मैच नहीं हो पाया। बाद में पता चला कि शकुंतला देवी का ही जवाब सही था और असल जवाब गलत था।

उन्होंने किताबें भी लिखीं। उन्होंने समलैंगिकों पर The World of Homosexuals लिखी जो भारत में समलैंगिकों की स्टडी के लिए पहली विस्तृत पुस्तक थी। उन्होंने ज्योतिषशास्त्र और याददाश्त बढ़ाने पर भी किताबें लिखीं।

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