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क्या मांगलिक का गैर मांगलिक के साथ हो सकता है विवाह ? क्या वाकई लगता है दोष ?

हम कितने भी मॉडर्न क्यूँ ना हो जाएं लेकिन जब बात किसी अपने की होती है तो बिना मुहूर्त निकाले शादी करने की सोच भी नहीं सकते हैं। और तो और मुहूर्त के साथ लड़के-लड़की के गुण भी मिलाते हैं और यह भी पता लगाते हैं की कहीं नाड़ी दोष तो नहीं है। जी हाँ हम वही लोग हैं जो कितना भी पढ़ क्यों ना लें लेकिन हमें पता है कि हमारी संस्कृति में बताई गयी हर बात के पीछे एक साइंस है। शादी में गुण, नाड़ी या मुहूर्त जैसी चीजों का सम्बन्ध होना भी एक साइंस हैं।

लोगों की मानें तो मांगलिक व्यक्ति की शादी अगर गैर मांगलिक से होती है तो वैवाहिक जीवन में काफी परेशानियाँ आती हैं। कुछ लोग तो यहाँ तक भी कहते हैं की ऐसी शादी में जो गैर मांगलिक होता है उसकी मृत्यु तक हो सकती है, लेकिन ये बात पूरी तरीके से सही नहीं है। ये सच है कि जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर असर जरूर पड़ता है अगर सच में आपकी कुंडली पर मंगल का प्रभाव है तो। हम आधी अधूरी जानकारी की वजह से हमेशा संशय में रहते हैं। इसलिए इस लेख में हम आपको विस्तार से बतायेंगे की कब मंगल दोष का दुष्प्रभाव होगा और कब नहीं।
गुण मिलेंगे तभी दो अजनबियों में सामंजस्य बनेगा और जिंदगी आसान बनेगी। इसी प्रकार मांगलिक और गैर मांगलिक का भी हमारी जिंदगी में काफी महत्व होता है। अब सबसे पहले बात आती है की हम कैसे जानें की हम मांगलिक हैं ? जब किसी की कुंडली में मंगल बारहवें लग्न, प्रथम, दूसरे, चौथे, सातवें और आठवें भाव पर होता है तो व्यक्ति मांगलिक होता है। मांगलिक होना कोई इतनी बड़ी बात नहीं होती है जितना इसे ज्योतिष लोग बढ़ा चढ़ाकर बताते हैं ।

अक्सर लोग समझते हैं की मांगलिक होना गलत बात है यह एक मिथ्या है। मंगल दोष वाले प्रायः निडर और निर्भीक होने के साथ-साथ सेल्फ रिस्पेक्ट वाले होते हैं। लेकिन अगर कुछ नियम बनें हैं तो उनके पीछे कुछ साइंस तो है ही जो अपना प्रभाव जरूर दिखाएगी। इसलिए आप कुछ केसेज़ में मांगलिक की शादी गैर मांगलिक से करा सकते हैं।
अगर आप मांगलिक हैं और आपकी शादी गैर मांगलिक से हुई है तो आपकी कुंडली के हिसाब से मंगल जिस भाव में होगा वैसा प्रभाव डालेगा। आइये जानते हैं कि किस भाव में मंगल के रहने से क्या प्रभाव पड़ता है?

पहले भाव में मंगल के रहने से पति-पत्नी में आपसी असहमति, मेन्टल स्ट्रेस और स्वास्थ्य में परेशानी आ सकती है।
दूसरे भाव में मंगल के प्रभाव से पारिवारिक कलह होती है और रिश्तेदारी में दुश्मनी का खतरा बढ़ता है।
चौथे भाव में मंगल होने से नौकरी या रूपये पैसे की दिक्कतों का आना सामान्य है।
सातवें भाव में मंगल होने से व्यक्ति का चरित्र और स्वाभाव अजीब सा होता है और ऐसे इंसान के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होने के चांस सबहूत ज़्यादा रहते हैं।
आठवें भाव में मंगल होने से दोनों पति-पत्नी के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
बारहवें भाव में मंगल होने से इंसान अपने आस-पास बहुत सरे दुश्मन बना लेता है, साथ ही पैसों से सम्बंधित परेशानी भी होती है।
मंगल दोष दूर करने के लिए कुछ अचूक उपाय हैं जो व्यक्ति को काफी परेशानियों से बचाते हैं, जैसे-

मंगल दोष वाले व्यक्ति की शादी मंगल दोष वाले दूसरे व्यक्ति से होनी चाहिए, क्योंकि 2 व्यक्तियों के मंगल गुण मिलकर दोष समाप्त हो जाते हैं।
अगर कोई लड़की मांगलिक है तो शादी से पहले उसका विवाह किसी घड़े से या पीपल के पेड़ से करना चाहिए जिससे लड़की मंगल दोष से मुक्त हो जाती है। लेकिन यह उपाय हम सिर्फ लड़कियों के लिए उपयोग में ला सकते हैं।
ऐसा भी कहा जाता है की अगर आपकी उम्र 28 वर्ष से अधिक है तो मंगल दोष ख़तम हो जाता है, अतः 29वें वर्ष में शादी करना भी इस समस्या का एक समाधान है।
इन सभी उपायों के साथ-साथ सबसे कारगर उपाय है हर मंगलवार हनुमान जी का पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखना और नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना।
बहुत बार ऐसा भी होता है जब मंगल पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बराहवें भाव में होता है लेकिन फिर भी इंसान मांगलिक नहीं होता क्योंकि बहुत से ऐसे कारक होते हैं जिनके प्रभाव से मंगल दोष नष्ट हो जाता है। वो कारक जो मंगल दोष को नष्ट करते हैं वो निम्न प्रकार के होते हैं-

अगर आपके कुंभ लग्न की कुंडली में मंगल यदि चौथे और आठवें घर में हो तो मांगलिक दोष नहीं लगता।
अगर आपकी कुंडली में अच्छे बृहस्पति अथवा शुक्र ग्रह हों तो मांगलिक दोष खत्म हो जाता है।
मीन और धनु लग्न वाली कुंडली में अगर आठवें घर में मंगल हो तो मांगलिक दोष खत्म हो जाता है।
अगर शुक्र की राशि तुला या वृष के बारहवें भाव में मंगल होता है तो भी मंगल दोष का प्रभाव नहीं होता।
कन्या और मिथुन राशि के अगर दूसरे भाव में मंगल बैठा है तो मंगल दोष नहीं लगता।
इसके अलावा अगर कुंडली में मंगल दोष है और कुंडली में उसी भाव में मंगल के सामने शनि, बृहस्पति, राहू या केतू विद्दमान हैं तो मांगलिक दोष खुद ही खत्म हो जाता है।

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