Breaking News
Home » Astrology » कृष्ण जन्‍माष्‍टमी मनाएं हर्ष और उल्लास से ..जाने पूजा की विधि

कृष्ण जन्‍माष्‍टमी मनाएं हर्ष और उल्लास से ..जाने पूजा की विधि

हिंदुओं के प्रमुख त्‍योहारों में से एक कृष्ण जन्‍माष्‍टमी का पर्व बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। जन्माष्टमी से पहले ही भक्‍त अपने भगवान के जन्‍मोत्‍सव को मनाने की तैयारियाें में जुट जाते हैं। भगवान विष्‍णु ने कृष्‍ण के रूप में अधर्म का नाश करने और मानवता के कल्‍याण के लिए भाद्र मास के कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी को देवकी के घर जन्‍म लिए थे। इस उपलक्ष्‍य में श्रद्धाुल वृत रखकर और मंगल गीत गाकर भगवान कृष्‍ण का लड्डू गोपाल के रूप में जन्‍मदिन मनाते हैं।

अबकी बार पंचांग में 23 अगस्त को और कुछ में 24 अगस्त को जन्माष्टमी की तिथि बताई गई है। श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था और 23 अगस्त को ये दोनों योग रहेंगे। जबकि श्रीकृष्ण की जन्म स्थली मथुरा में 24 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

स्मार्त संप्रदाय के मंदिरों में, साधु-संन्यासी, शैव संप्रदाय शुक्रवार यानी 23 अगस्त को, जबकि वैष्णव संप्रदाय के मंदिरों में शनिवार यानी 24 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

भगवान कृष्ण की पूजा सामग्री में पंचामृत, गंगाजल, दही, शहद, दूध, दीपक, घी, बाती, धूपबत्ती, गोकुलाष्ट चंदन, साबुत चावल, एक खीरा, एक चौकी, पीला साफ कपड़ा, बाल कृष्ण की प्रतिमा, एक सिंहासन, तुलसी का पत्ता, माखन, मिश्री, भोग सामग्री के रुप में उपयोग करें। बाल गोपाल का जन्म रात 12 बजे के बाद होगा। सबसे पहले आप बाल गोपाल कृष्ण को दूध से स्नान करवाए। इसके बाद दही, फिर घी, इसके बाद शहद से स्नान कराने के बाद गंगाजल से अभिषेक करें। ऐसा शास्त्रों में वर्णित है।

About dhamaka