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आज भारत रत्न विश्वेश्वरैया का जन्मदिन जिसे हम इंजीनियर्स डे रूप में मानते है और आज ही के दूरदर्शन का भी जन्म हुआ

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भारत में अभियंता दिवस यानी इंजीनियर डे 15 सितंबर को मनाया जाता है। 15 सितंबर भारत के एक सिविल इंजीनियर और राजनेता सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्मदिन है। उनका जन्मदिवस इंजीनियर्स डे के रूप में मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं की, इंजीनियर डे क्यों मनाया जाता है? इसका महत्व क्या है। अगर नहीं पता है तो, आज हम आपको इस पोस्ट में यही बताने वाले हैं की, हम 15 सितंबर को इंजीनियर दिवस क्यों मनाते है?

इंजीनियरों को आधुनिक समाज की रीढ़ के रूप में देखा जाता है। इंजीनियर्स एक प्रकार के जादूगर होते है, वे अपनी रचनाओं से दुनिया को विस्मित और मोहित करते रहते हैं। एक इंजीनियर भविष्य के काम को आसान बनाने और परिपक्वता और क्षमता के उच्च स्तर तक पहुंचने के लिए उपकरण बनाता है।
एक उन्नत तकनीकी दुनिया में, हमें अपने विचारों को वास्तविक मैं बदलने के लिए इंजीनियरों की आवश्यकता है। आज की दुनिया में इंजीनियरिंग एक बहुत ही महत्वपूर्ण अनुशासन है।

वैज्ञानिक, इंजीनियर देश के विकास में अद्भुत भूमिका निभाते हैं। इसलिए वे सम्मान के हकदार होते हैं।

जिस तरह शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए टीचर्स डे, डॉक्टरों को सम्मानित करने के लिए डॉक्टर डे, माता-पिता को सम्मानित करने के लिए मदर्स डे, फादर्स डे मनाए जाते हैं,

उसी तरह इंजीनियरों को उनके योगदान के लिए धन्यवाद देने और उनका सम्मान करने के लिए सभी इंजीनियरों को समर्पित एक दिन होना चाहिए।

हम 15 सितंबर को इंजीनियर दिवस क्यों मनाते हैं?
सर एम विश्वेश्वरैया को भारत में वर्षा जल संसाधनों के दोहन में उनकी प्रतिभा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त थी।

उन्होंने स्वचालित वियर वॉटर फ्लड गेट्स को डिजाइन किया था, जिसे पहली बार 1903 में पुणे के खडकवासला जलाशय में स्थापित किया गया था।

भारत में टीवी और दूरदर्शन का इतिहास एक-सा है। 15 सितंबर 1959 को दिल्ली में दूरदर्शन की शुरुआत हुई। तब यह टेस्टिंग फेज में था। नाम दिया गया था टेलीविजन इंडिया। 1975 में दूरदर्शन नाम रखा गया। भले ही टीवी आज बुद्धू बक्सा बन गया हो और इस पर चौबीसों घंटे दुनिया तमाम के चैनल नजर आते हैं, लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं रहा है। जब दूरदर्शन शुरू हुआ तो सप्ताह में तीन दिन आधा-आधा घंटे प्रसारण होता था। 1965 में दूरदर्शन पर रोजाना कार्यक्रम प्रसारित होने लगे। पांच मिनट के न्यूज बुलेटिन भी शुरू हुए। लेकिन, टीवी की ग्रोथ शुरुआत में बेहद धीमी रही। 1975 तक सिर्फ सात शहरों तक पहुंच सका था। 1982 में रंगीन टीवी आए और एशियाई खेलों के प्रसारण ने तो इसकी लोकप्रियता को कई गुना बढ़ा दिया था। यहीं से टीवी का कायापलट हुआ। नए-नए प्रोग्राम बनने लगे। धीरे-धीरे सुबह और फिर दोपहर को प्रोग्राम प्रसारित होने लगे। शाम को रोज प्रसारित होने वाला कृषि दर्शन, हफ्ते में दो बार चित्रहार और रविवार को आने वाली रंगोली की लोकप्रियता की बराबरी आज का कोई प्रोग्राम नहीं कर सकता। 1966 में शुरू हुए कृषि दर्शन का योगदान देश में हरित क्रांति लाने में भी रहा है। आज 2 राष्‍ट्रीय और 11 क्षेत्रीय चैनलों के साथ दूरदर्शन के कुल 21 चैनल प्रसारित होते हैं।

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