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अमेरिका 20 करोड़ रुपये की लागत के 200 वेंटिलेटर भारत भेजेगा- रिपोर्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना वायरस (COVID-19) के खिलाफ लड़ाई के लिए भारत को 200 वेंटिलेटर दान देने की घोषणा की थी।

बताया जा रहा है कि अमेरिका हवाई रास्ते से भेजे जाने वाले हर वेंटिलेटर के लिए लगभग 10 लाख रुपये खर्च करेगा।

ट्रंप ने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा था कि अमेरिका अपने दोस्त भारत को वेंटिलेटर दान करेगा। संकट की घड़ी में अमेरिका नरेंद्र मोदी और भारत के साथ है।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, “माना जा रहा है कि वेंटिलेटर की यह खेप इस महीने के अंत या जून की शुरुआत तक पहुंच जाएगी।”

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका से आने वाले हर वेंटिलेटर की अनुमानित लागत लगभग 9.6 लाख रुपये होगी। इसमें परिहवन का खर्च शामिल नहीं होगा। कुल मिलाकर 200 वेंटिलेटर के लिए अमेरिका को लगभग 19.2 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। इस लागत में भाड़ा शामिल नहीं है।

वैक्सीन बनाने में भी साथ काम कर रहे भारत और अमेरिका
ट्रंप ने ट्विटर पर लिखा, ‘मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका अपने दोस्त भारत को वेंटिलेटर दान करेगा। महामारी के इस दौर में हम भारत और नरेंद्र मोदी के साथ हैं। हम वैक्सीन बनाने की दिशा में भी साथ काम कर रहे हैं। हम साथ मिलकर इस अदृश्य दुश्मन को हराएंगे।’

ट्रंप ने यह ऐलान ऐसे समय किया है जब भारत में संक्रमितों की संख्या चीन को पछाड़ते हुए 85,000 पार कर गई है।

कोरोना संक्रमितों के लिए इसलिए जरूरी होते हैं वेंटिलेटर
कोरोना वायरस के मरीजों को निमोनिया होता है। वायरस के शरीर में जाने के बाद मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है, जिसे ब्रांकिओल्स बोला जाता है।

इससे सांस लेते समय फेफड़ों और उन सभी नसों में जलन होती है, जहां से हवा गुजरती है।

कई बार हालत इतनी खराब हो जाती है कि मरीज न सांस ले पाता है और न ही सांस छोड़ पाता है।

ऐसी स्थिति में संक्रमित व्यक्ति के लिए वेंटिलेटर की जरूरत होती है।
भारत ने अमेरिका को भेजी थी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन
ट्रंप के भारत को वेंटिलेटर देने के फैसले को धन्यवादी कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल, ट्रंप के कहने पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन (HCQ) के निर्यात से प्रतिबंध हटाया था।

ट्रंप ने इस दवा को कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में ‘गेम चेंजर’ बताया था।

भारत में यह दवा अग्रिम मोर्चे पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को दी जा रही है।

दोनों देशों के मजबूत होते द्विपक्षीय रिश्ते
साथ ही विशेषज्ञ ट्रंप के इस कदम को भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय रिश्तों से जोड़कर भी देख रहे हैं। इनका कहना है कि अलग-अलग स्तरों पर दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ रहा है।

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