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अब कोई आपसे आधार नहीं मांगेगा, आधार नहीं होने पर किसी भी सेवा से वंचित नहीं किया जा सकता : रविशंकर प्रसाद

संसद ने बैंक में खाता खोलने और मोबाइल फोन का सिम लेने के लिए ‘आधार’ को स्वैच्छिक बनाने संबंधी ‘आधार और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक 2019′ को सोमवार को मंजूरी प्रदान कर दी.

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राज्यसभा ने चर्चा के बाद इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया. लोकसभा में यह विधेयक पिछले सप्ताह बृहस्पतिवार को ही पारित किया जा चुका है. उच्च सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आधार में संरक्षित डाटा को पूरी तरह से सुरक्षित बताया. उन्होंने कांग्रेस सहित अन्य सदस्यों द्वारा डाटा सुरक्षा कानून बनाने की मांग पर आश्वासन दिया कि सरकार जल्द ही ‘डाटा संरक्षण विधेयक’ पेश करेगी.

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इसकी प्रक्रिया तीव्र गति से चल रही है. प्रसाद ने इस विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष द्वारा डाटा सुरक्षा को लेकर उठाये गये सवालों के जवाब में कहा, पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने ‘आधार’ को कानूनी आधार दिये बिना ही लागू कर दिया था इसलिए यह निराधार था. इसे हमने कानूनी आधार प्रदान किया है.

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प्रसाद ने ‘आधार और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक 2019’ सोमवार को सदन में चर्चा के लिए पेश करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुसार आधार के आंकडों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाता है और इससे लोगों का जीवन सरल बना है. यह विधेयक गत दो मार्च को लाए गए ‘आधार और अन्य विधियां (संशोधन) अध्यादेश 2019’ के स्थान पर लाया गया है.

इससे पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विश्वम, डी राजा, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के इलामारम करीम और कांग्रेस के डी सुब्बारामी रेड्डी ने आधार से संबंधित अध्यादेश के विरोध में सांविधिक संकल्प पेश किया. विश्वम ने कहा कि अध्यादेश लाना सरकार की प्रवृति बन गई है और यह लोकतांत्रिक प्रणाली के खिलाफ है. उन्होंने विधेयक को समीक्षा के लिए स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की.

प्रसाद ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी आधार को लेकर टिप्पणियां की हैं और सरकार उसी के अनुरूप कदम उठा रही है.उन्होंने स्पष्ट किया कि आधार को किसी भी सेवा के लिए अनिवार्य नहीं किया गया है.आधार पूरी तरह वैकल्पिक और स्वैच्छिक है. इसके लिए बैंक और दूरसंचार कंपनियों को उपभोक्ता से अनुमति लेनी होगी. यह आंकड़ा पूरी तरह सुरक्षित है.

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